यमुनानगर। दड़वा में गोशाला और ससौली में नंदीशाला बनाने की परियोजना जमीन चिह्नित करने से आगे नहीं बढ़ पाई। हालांकि इसके लिए दो साल पहले सदन की बैठकों में प्रस्ताव पास हो चुके हैं, तब भी गोशालाएं नहीं तैयार हो सकीं। ऐसे में अभी भी गोवंश सड़कों पर घूमते व कचरे में निवाला ढूंढते दिखाई दे रहे हैं।
जानकारी के अनुसार 30 जून 2021 को नगर निगम सदन की बैठक में दड़वा में गोशाला का निर्माण करने का प्रस्ताव पास हुआ था। इसके लिए दड़वा में करीब पांच एकड़ जमीन चिन्हित की गई थी, पर इसके आगे गोशाला निर्माण की कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे ही 24 मार्च 2022 की सदन बैठक में ससौली में गोचरान की भूमि पर नंदीशाला बनाने का प्रस्ताव पास किया गया। इसमें नंदीशाला का कार्य पूरा न होने तक बेसहारा पशुओं काे रखने वाली गोशाला को 2100 रुपये प्रति बड़ा पशु व 1100 रुपये प्रति छोटा पशु नगर निगम फंड से देने की भी बात पर निर्णय हुआ था। ससौली में नंदीशाला के निर्माण के लिए भी 14 एकड़ जमीन चिह्नित की गई, पर निर्माण के लिए कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए शहर की सड़कों पर आज भी गोवंश घूम रहे हैं और हादसों का कारण बन रहे हैं। स्थिति यह है कि ऐसी कोई कॉलोनी नहीं, जहां गाय व गोवंश कचरे में निवाला ढूंढते न दिखें। संवाद
प्रस्ताव पास, पर कार्रवाई ढाक के तीन पात
निवर्तमान पार्षदों में निर्मल चौहान ने कहा कि 15 अगस्त 2017 को नगर निगम अफसरों ने शहर काे कैटल फ्री घोषित किया था। उस दौरान शहर की गलियों व सड़कों से 549 गोवंश व अन्य पशुओं को पकड़ कर गोशाला भेजा गया था, लेकिन इसके आगे यह कार्रवाई सुस्त पड़ गई, क्योंकि संस्थाओं की गोशालाओं में जगह कम होने लगी। गलियों-सड़कों पर गोवंश के लिए गोशालाओं का प्रस्ताव कई बार सदन बैठकों में पास हो चुका है, पर कार्रवाई ढाक के तीन पात है।
सिर्फ कागजों में काम दिखाने के प्रयास-
गोसंवर्धन न्यास के जिला संयोजक दीक्षित शर्मा ने कहा कि सदन में प्रस्ताव पास कर केवल कागजों में काम दिखाने का प्रयास है, जबकि जमीन पर नंदी व गोशाला निर्माण की कोई कार्रवाई नहीं हुई। वह भी तब जब निगम क्षेत्र में गोचरान की 4200 एकड़ भूमि है, जिसे कब्जा मुक्त कराने की एक दशक से चल रही मांग भी पूरी नहीं हो पाई है।
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वर्जन-
इस बारे में संबंधित अफसरों से बात करेंगे। मामले में जो भी नियमानुसार कार्रवाई बनेगी, वह अमल में लाएंगे। - आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।
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