यमुनानगर। कार सेल-परचेज कारोबारी की हत्या की साजिश रचने के मामले में रिमांड खत्म होने के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं और पूरी साजिश योजनाबद्ध तरीके से रची जा रही थी।
जांच में सामने आया कि विदेश में बैठे कुख्यात नोनी राणा के इशारे पर आरोपियों तक एक संदिग्ध बैंक खाते के जरिए 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इसी लेनदेन ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। एसटीएफ ने इस ट्रांजैक्शन को आधार बनाकर आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी और उनकी लोकेशन ट्रैक कर दबोचा। अधिकारियों का मानना है कि यह रकम एडवांस के तौर पर दी गई थी और इसके पीछे बड़ा फंडिंग नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। पूछताछ के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर दो बाइक बरामद की गई हैं, जिनका इस्तेमाल वारदात में होना था। वहीं गिरफ्तारी के समय दो पिस्टल, मैगजीन और 19 कारतूस भी मिले थे। इससे साफ है कि आरोपी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे। पुलिस के अनुसार, समय रहते कार्रवाई होने से एक बड़ी घटना टल गई। एसटीएफ अब पूरे गैंग नेटवर्क, विदेशी फंडिंग चैन और इससे जुड़े अन्य आपराधिक कनेक्शन की गहन जांच में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
वहीं, एसटीएफ के उपनिरीक्षक सौरव रावत ने बताया कि पूछताछ में चारों आरोपियों ने कुख्यात अपराधी से अपने पुराने संबंधों की बात स्वीकार की है। जांच में सामने आया कि विदेश में बैठे नोनी राणा के निर्देश पर एक संदिग्ध बैंक खाते से आरोपियों में से एक के खाते में 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इसी इनपुट के आधार पर एसटीएफ ने उनकी गतिविधियों पर निगरानी शुरू की और लोकेशन ट्रैक कर कार्रवाई की। गोपनीय सूचना के आधार पर रविवार रात थाना छप्पर क्षेत्र में संगम ढाबा के पास घेराबंदी कर कार सवार चारों युवकों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विशाल कॉलोनी निवासी राहुल, फतेहगढ़ निवासी विशाल सैनी तथा खुर्दबन निवासी विनोद और शुभम के रूप में हुई है।