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सांसद के गोद लिए गांव का सच

Tue, 31 May 2016 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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सांसद - फोटो : ब्यूरो
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यमुनानगर। अंबाला सांसद रतनलाल कटारिया द्वारा सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत खदरी गांव को गोद लिए एक साल पूरे हो गए है। खदरी को आदर्श ग्राम बनाने के लिए पूरा प्रशासनिक अमला साल भर जुटा रहा। इस एक साल में गांव में क्या बदलाव हुए, यह जानने के लिए अमर उजाला ने खदरी का रुख किया तो सरकारी दावों और जमीनी हकीकत की परत-दर-परत सामने आई।
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जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर खदरी गांव स्थित है। मुख्य सड़क से खदरी में प्रवेश किया तो सड़क किनारे लगे ट्री गार्ड से आदर्श ग्राम का आभास हुआ, लेकिन तुरंत ही वातावरण में फैली दुर्गंध ने नाक पर रुमाल ढकने को विवश कर दिया। सड़क के दोनों तरफ पड़े गोबर व कूड़े के ढेर इस आदर्श ग्राम की स्वच्छता की सच्चाई बयां करते दिखें। सड़क किनारे गोबर व कूड़ा क्यों डालते हो, लोगों से यह सवाल किया तो एक बुजुर्ग व महिला भड़क गईं।

लड़ने के अंदाज में बुजुर्ग बोला, यहां न डालें तो कहां डालें, हमें कौन सी कालोनी (सौ-सौ गज के प्लाट) मिली हैं। महिला हमें अपने साथ वाल्मीकि बस्ती में ले गई और छोटे-छोटे मकान दिखाते हुए बोली-एक मकान में 10-15 इंसान रहते हैं। यहां इंसानों के रहने की जगह नहीं है तो कूड़ा कहां रखेंगे। वापस मोड़ पर आए तो कुछ ग्रामीणों ने दबी आवाज में कहा कि पंचायत की करीब सौ जमीन हैं, लेकिन उस पर दबंगों ने कब्जा किया हुआ है।
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गांव की सरपंच सुमन के पति कुलबीर ने बताया कि पंचायत की जमीन का कोर्ट केस चल रहा है, जिस कारण गरीबों को सौ-सौ गज के प्लाट नहीं मिल पाए हैं।

-ट्री गार्ड से हो रही सूखे पौधों की सुरक्षा
सड़क किनारे पौधों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए ट्री गार्ड तो लगा दिए गए, लेकिन उनमें लगे पेड़-पौधों की सुध नहीं ली जा रही है। यहां लगे अधिकतर ट्री गार्ड के भीतर पौधे सूख चुके हैं। कुछ ट्री गार्ड तो उखड़ चुके हैं। पहले मोड़ पर रुककर लोगों से गांव में आए बदलाव की बाबत पूछा तो एक-एक कर सभी अपने दिल का हाल बयां करने लगे।

सड़क पर खेल रहे मुस्लिम बस्ती के बच्चें शमीम, शाहरुख व साहिल ने कहा कि गांव में कोई स्टेडियम नहीं है। हमें सड़क पर ही खेलना पड़ता है। गौरतलब है कि खदरी को आदर्श गांव बनाने के लिए तैयार किए विलेज डेवलपमेंट प्लांट में गांव में स्टेडियम के निर्माण को शामिल ही नहीं किया गया है।

-दो महीने में ही बंद हो गई सोलर लाइट-
गांव में स्ट्रीट लाइट के बारे में पूछा तो एक व्यक्ति रामबांस माजरी ले गया। यहां गली में लगी एक सोलर लाइट दिखाते हुए बोला कि करीब चार महीने इसे लगाया गया था, लेकिन एक-दो महीने बाद ही बंद हो गई। तब से इसे ठीक नहीं किया गया है। गांव की अन्य स्ट्रीट लाइट भी खराब पड़ी हैं।

-सड़कें न बनने पर किया था चुनाव का बहिष्कार-
खदरी ग्राम पंचायत में ब्राहमण माजरा भी आता है। खदरी से ब्राह्मण माजरा आने के लिए तीन सड़कें हैं, जिनमें दो कच्ची हैं और एक सड़क पर करीब 10 साल पहले ईंटें डाली गई थी। ग्राम पंचायत के पंच विजय पंडित, पूर्व पंच राजिंद्र व सुरेश कुमार ने बताया कि देश आजाद होने के बाद ब्राह्मण माजरा की सड़कें नहीं बनी हैं।

बीते लोकसभा चुनाव में ब्राह्मण माजरा के लोगों ने रोष स्वरूप चुनाव का बहिष्कार कर दिया है। उस समय सांसद बने रतनलाल कटारिया के समर्थकों ने चुनाव जीतने पर तीनों सड़कें पक्की करवाने का वादा किया था, जिसके बाद लोगों ने चुनाव में वोट डालें। रतनलाल कटारिया चुनाच जीत गए और उन्होंने खदरी को गोद भी ले लिया, लेकिन आज तक ब्राह्मण माजरा की सड़कें नहीं बन पाई हैं।

उधर, खदरी की मुख्य सड़क से रामबांस में जाने वाली सड़क भी कच्ची पड़ी है। एक ग्रामीण ने बताया कि पिछले करीब चार दशकों से सड़क नहीं बनी है।

-संतोषजनक नहीं सफाई व्यवस्था-
खदरी में सफाई व्यवस्था बुरी तरह चरमराई हुई है। रामबांस में खेड़ा मंदिर के बाहर ही कूड़े का ढेर लगा रहता है। वहीं सफाई कर्मचारी नालियों की सफाई के बाद कूड़ा नाली के बाहर ही छोड़ जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सांसद द्वारा गांव को गोद लेने के बाद डस्टबिन लगाए गए हैं, लेकिन इसमें से कई-कई दिनों तक कूड़ा निकाला नहीं जाता।

सांसद के गोद लेने के बाद गांव में क्या बदलाव आया, इस बारे में लोगों से पूछा तो अधिकतर ने यही जवाब दिया कि समस्याएं पहले भी थी और आज भी है। ग्रामीणों ने कहा कि डस्टिबन, सोलर लाइट और ट्री गार्ड लगा देने से ही गांव आदर्श नहीं हो जाएगा। गांव के लोगों की मुख्य जरूरतों की ओर भी ध्यान देना चाहिए।
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