सेक्टर-17 की अधिकांश सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, जिसे देख सेक्टर के लोग नगर निगम की ओर से यहां से की सड़कों के सुधार के लिए विशेष बजट बनाने की मांग कर रहे है। उनकी मानें तो मौजूदा समय में सेक्टर की ज्यादातर सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, जिनकी हालत मानसून सीजन के बाद और ज्यादा बिगड़ गई। जिन्हें समय रहते दुरुस्त नहीं किया गया तो यह आने-जाने वाले लोगों के लिए दुर्घटना की वजह बनेंगी।
हंसराज शर्मा ने कहा कि सेक्टर-17 जब तक हुडा के अंतर्गत था, तब तक यहां की सभी सड़कें, लिंक मार्ग व गलियों सपाट रहती थी। उनकी समय रहते मरम्मत होती थी। उस दौरान कभी सड़कों पर गड्ढे नहीं दिखे, पर सेक्टर के नगर निगम में शामिल होने के बाद से सड़कें टूटती गईं और उनकी मरम्मत नहीं कराई गई। इसलिए इनके लिए नगर निगम को विशेष बजट रखना चाहिए।
राजिंद्र वालिया ने कहा कि हुडा से निगम में शामिल होने के बाद सेक्टर-17 में बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं किया गया। यहां पहले से मौजूद अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम की सफाई नहीं की गई। जाे ज्यादातर जगह ब्लॉक है। इससे बारिश के दौरान पानी की निकासी नहीं हो पाई और वह सड़कों पर काफी समय रहा। इसी से सड़कें कमजोर होकर टूट गईं। सड़कों के निर्माण से पहले नगर निगम को यहां पानी निकासी की व्यवस्था सुधारनी चाहिए।
राजिंद्र चौहान ने कहा कि सेक्टर-17 के ज्यादातर लिंक मार्ग व गलियों में सड़कें टूट कर बिखर चुकी है। जहां दूर तक बजरी ही बिखरी पड़ी है, जो आने-जाने वाले वाहन चालकों के लिए हादसे की वजह बन सकती है। क्योंकि कई बार खासकर दोपहिया वाहनों के बजरी पर फिसलने से चालक चोटिल होने से बचे हैं। इसलिए नगर निगम को समय रहते ऐसे मार्गों की प्राथमिकता से हालत सुधारनी चाहिए।
पार्षद रामआसरा भारद्वाज ने कहा कि सेक्टर की सड़कों के मौजूदा हालात के लिए नगर निगम अफसर जिम्मेदार हैं। क्योंकि साढ़े चार साल से उन्हें मौखिक रूप से बताने के अलावा सदन बैठकों के एजेंडे में प्रस्ताव देकर सेक्टर की सड़कों का मुद्दा रखा गया है। बावजूद इसके नगर निगम अफसर सुनवाई नहीं कर रहे हैं। जबकि टूटी सड़कें राहगीरों के लिए हादसे की वजह बन सकती हैं, इसलिए इनके निर्माण व मरम्मत की जानी चाहिए।
सेक्टर-17 की कई सड़कों पर मरम्मत के काम हो चुके हैं व अन्य सड़कों का कार्य भी प्रगति पर है। इसके अलावा जो सड़कें रह गई हैं, उनके लिए भी संबंधित शाखा के अफसरों को निर्देश दिए गए हैं।- आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।