संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में स्टोन क्रशर संचालकों को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने संचालकों की याचिका को खारिज कर दिया है। जिसके बाद मानकों को पूरा नहीं करने वाले 70 से अधिक स्टोन क्रशरों पर बंदी की तलवार लटक गई है। ऐसे स्टोन क्रशरों को चिन्हित किया जा रहा है। जल्द ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यमुनानगर की ओर से नोटिस जारी किए जाएंगे।
स्टोन क्रशर संचालन को लेकर मई 2016 में हरियाणा सरकार ने अधिसूचना हरियाणा जारी की थी, जिसमें तय किया गया था कि स्टोन क्रशर गांव की परिधि से कम से कम एक किमी दूर होना चाहिए और वन क्षेत्र के रूप में चिन्हित भूमि से कम से कम 500 मीटर होनी चाहिए। अधिसूचना जारी होने के बाद यमुनानगर जिले में लगे स्टोन क्रशर बड़ी संख्या में इसकी जद में आ रहे थे। इसके खिलाफ स्टोन क्रशर संचालकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
स्टोन क्रशर मालिकों का कहना था कि अधिसूचना याचिकाकर्ताओं के किसी भी पेशे को अपनाने, किसी भी व्यवसाय, व्यापार या कारोबार को करने के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। उनका कहना था कि यमुनानगर जिले के डोवाला और बालेवाला गांवों में प्रस्तावित क्रशर जोन का विस्तार कर समस्या का कुशलतापूर्वक समाधान हो जाएगा। याचिकाकर्ताओं ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर भी संचालन के लिए सहमति (सीटीओ) देने से इंकार करने के आरोप लगाए थे।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सभी स्टोन क्रशरों की याचिका को खारिज कर दिया है। जिससे 70 से अधिक स्टोन क्रशरों पर बंदी की तलवार लटक गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी ऐसे स्टोन क्रशरों को नोटिस देने की तैयारी कर रहा है।
हाईकोर्ट ने स्टोन क्रशरों की याचिका को खारिज कर दिया है। अब अधिसूचना की जद में आने वाले स्टोन क्रशरों को चिन्हित कर नोटिस जारी करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सभी को नोटिस देकर बंद कराया जाएगा। - विरेंद्र पूनिया, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी यमुनानगर।