संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मिड-डे मील मजदूर यूनियन के राज्य कमेटी के आह्वान पर मंगलवार को डीसी कार्यालय के सामने मंडी गेट पर मिड-डे मील कर्मियों ने विभिन्न मांगों को लेकर रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद उपायुक्त को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम ज्ञापन सौंपा।
जिला प्रधान शोभा देवी, शौभा, नैबो, सुनीता, बबली रानी, बबीता रानी, सुखबीर, रक्षा देवी आदि का कहना है कि पिछले 11 वर्षों में सरकार ने मिड-डे मील वर्करों के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। कर्मचारियों को नियमित करने, वेतन बढ़ाने और अन्य सुविधाएं देने के बजाय श्रम कानूनों में बदलाव कर कर्मचारियों के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।
यूनियन नेताओं का आरोप है कि लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करने के बावजूद सरकार उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर रही है।
यूनियन ने नई शिक्षा नीति के तहत स्कूलों के बंद होने और छात्र संख्या कम होने से मिड-डे मील वर्करों के रोजगार पर संकट खड़ा होने का भी आरोप लगाया। आरोप लगाया कि कई स्कूलों में मिड-डे मील कार्यकर्ताओं से रसोई कार्य के अलावा अन्य कार्य भी बिना अतिरिक्त भुगतान के कराए जा रहे हैं, जिसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए।
यूनियन की मांगों में 12 जनवरी 2026 को हुए समझौते को लागू करना, स्थायी कर्मचारी का दर्जा देना, नियमितीकरण तक 30 हजार रुपये न्यूनतम वेतन देना, 10 माह के बजाय पूरे 12 माह का मानदेय देना, वर्दी भत्ता और सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करना शामिल है।
इसके अलावा कार्य के दौरान घायल होने पर उपचार का पूरा खर्च विभाग द्वारा वहन करने, मृत्यु होने पर पांच लाख रुपये की सहायता राशि देने, मानदेय प्रत्येक माह की सात तारीख तक जारी करने तथा निजीकरण, नई शिक्षा नीति और लेबर कोड वापस लेने की भी मांग उठाई।