संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग हुआ। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सिद्धेश्वरी भारती ने प्रकृति के प्रति जागरूकता के लिए सभी को प्रेरित किया। कार्यक्रम संस्थान की ओर से सभी को पौधे वितरित किए गए।
साध्वी सिद्धेश्वरी भारती ने कहा कि मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति से खिलवाड़ व अन्याय किया है। इसी का परिणाम आज संपूर्ण जीवों को भुगतना पड़ रहा है। मानवीय कलापों से पृथ्वी से कई प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं। इसके अलावा प्राकृतिक असंतुलन भी बढ़ गया है। कहीं पर अधिक गर्मी से सूखा, कहीं पर अधिक वर्षा से बाढ़ तो कहीं पर दुर्घटनाएं हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि जल व वायु प्रदूषण के सभी संकेत हैं कि हमने प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह नहीं किया है। परमात्मा ने मनुष्य को सृष्टि का सिरमौर बनाया, लेकिन यह मनुष्य का दुर्भाग्य है कि प्रकृति का संरक्षण करने की अपेक्षा स्वार्थ के लिए इसका दोहन किया है। यदि भूमि में एक बीज डाला जाए तो वह हजारों अन्य बीज पैदा करके हमें देती है, वाष्प रूप में वायु में गया जल वर्षा रूप में पुनः धरती पर आता है।
इसी प्रकार मनुष्य प्रकृति को जो देता है प्रकृति कई गुना करके वह लौटाती है। पुरातन समय में भारतीय परंपरा के अनुसार मानव जीवन की दिनचर्या प्रकृति के अनुकूल रही है। प्रातः काल दिन की शुरुआत भूमि, जल और सूर्य के पूजन और हवन से की जाती थी। हवन से शुद्ध घी और सामग्री वायु में मंत्रों से प्रकृति को दी जाती थी। उसी से भूमि में वनस्पति उत्पादन होता था।
उन्होंने बताया कि सनातन पुरातन परंपराएं सदा से ही मनुष्य के जीवन का संपूर्ण विकास व उत्थान करने के लिए बनी हैं। परंतु समय के साथ हम अपनी परंपराओं और भारतीय संस्कृति को भूलते चले जा रहे हैं। कदाचित इसलिए आज संपूर्ण मानवता पीड़ित और आहत है। मानव जीवन का मूल उसके मन के विचार हैं।
मन के विचार सकारात्मक होंगे तो निश्चित ही मनुष्य द्वारा किया हर कार्य सकारात्मक दिशा की ओर अग्रसर होगा। परंतु मानव मस्तिष्क के विचार दूषित हो जाए तो वह वातावरण भी प्रदूषित ही करते हैं। वैज्ञानिक तथ्यों ने भी प्रमाणित कर दिया है कि जब मानव मस्तिष्क के भीतर कोई विचार की तरंग उठती है तो वह वातावरण पर प्रभाव डालती है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान ही वह दिव्य औषधि है, जिससे मानव मस्तिष्क पूर्ण रूप से सकारात्मक व दिव्य विचारों से परिपूर्ण हो सकता है। इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को पौधे वितरित किए गए और उन्हें पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई।