नगर निगम के वार्ड नंबर 16 से लेकर 22 में विकास कार्यों में तेजी लाने को लेकर बुधवार को मेयर मदन चौहान ने अधिकारियों व पार्षदों की मीटिंग ली। मेयर ने टेंडर अलॉट होने के बाद भी काम शुरू न करवाने व कार्यों में ढील बरतने वाले अधिकारियों की जमकर क्लास ली।
उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए निर्माणाधीन कार्यों में तेजी लाने व रुके हुए कार्यों को शुरू करने के लिए 30 अगस्त तक का टाइम दिया। निर्धारित समय अवधि में काम न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई। मेयर मदन चौहान ने सभी अधिकारियों को शहर के विकास कार्यों में किसी तरह की कोई कोताही न बरतने के भी कड़े निर्देश दिए। मीटिंग में एसई महीपाल सिंह, एक्सईएन आनंद स्वरूप, पब्लिक हेल्थ एक्सईएन गौतम कुमार, एमई राजबीर सैनी, जेई निखिल, पार्षद अभिषेक शर्मा, शिव राम, संदीप धीमान, अनिल कांबोज, तुलसी गोस्वामी, कृष्ण सिंगला आदि मौजूद रहे। बॉक्स
मेयर ने काम शुरू न करने पर अधिकारियों से मांगे जवाब : वार्ड नंबर 16 से लेकर 22 तक लगभग साढ़े सात करोड़ के 48 कार्यों के टेंडर अलॉट किए गए थे। इनमें से लगभग तीन करोड़ के कार्य प्रगति पर है। इनमें से कुछ कार्य पूरे भी किए जा चुके है। इनमें से अधिकतर कार्य 60 से 80 प्रतिशत तक पूरे हो चुके है। इसके अलावा लगभग चार करोड़ के कार्य अभी तक शुरू ही नहीं हो पाए। काम शुरू न करने पर मेयर ने अधिकारियों से जवाब मांगे। अधिकारियों ने टेंडर लेने वाली कंपनी, साइट प्रॉब्लम व टेक्निकल समस्याएं बताई। जिसपर मेयर ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि वे 30 अगस्त तक हर हाल में कार्य शुरू करे। यदि इन कार्यों को निर्धारित समय अवधि में शुरू न किया गया तो वे काम न करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई अमल में लाएंगे।
ढील बरतने वाली कंपनी को दे नोटिस : अधिकारियों ने बताया कि टेंडर अलॉट होने के बाद कुछ कंपनियां द्वारा भी काम शुरू नहीं किया जा रहा है। एक-एक कंपनी के पास कई कई टेंडर है। ऐसे में ठेकेदार द्वारा पहला काम पूरा होने के बाद टेंडर लगाने की बात कहीं जाती है। मेयर मदन चौहान ने कहा कि ऐसी कंपनी को नोटिस दिए जाएं। विकास कार्यों में ढील बरतने में किसी प्रकार की कोई कोताही नहीं बरती जानी चाहिए।
छोटे छोटे कामों का एक ही लगाए टेंडर : मीटिंग के दौरान दो से चार लाख रुपये के कार्यों के कई टेंडर सामने आए। मेयर चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस प्रकार के छोटे छोटे कार्यों का क्लब टेंडर बनाकर केवल एक ही टेंडर लगाया जाए। 45 से 50 लाख रुपये तक का एक टेंडर हो। जिसमें छोटे छोटे कई कामों को शामिल किया जाए। ऐसा करने से कंपनी भी टेंडर पर जल्दी कार्य करेगी और रिकॉल टेंडर भी नहीं करने पड़ेंगे।