संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम व्यासपुर में दमा, श्वास रोग, पुरानी खांसी एवं नजले के उपचार के लिए शरद पूर्णिमा पर आयुर्वेदिक शिविर लगाया गया। इस दौरान रोगियों को चंद्रमा की रोशनी में तैयार की गई औषधि मिश्रित खीर का वितरण किया गया।
औषधीय खीर पुरातन आयुर्वेदिक तरीके से तैयार की गई थी, ताकि रोगियों को पूर्ण लाभ मिले। रात्रि के शुभ मुहूर्त में श्रद्धालुओं ने खीर का प्रसाद ग्रहण किया और चिकित्सकों व विशेषज्ञों की देखरेख में रोगियों को दवा खिलाई गई। इस दौरान जागरण करवाया गया, जिसमें गुरु महिमा का भजनों से गुणगान किया गया।
स्वामी गुरुज्ञानानंद ने शरद पूर्णिमा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में आयुर्वेद का विशेष योगदान रहा है। विज्ञान द्वारा प्रमाणित आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियां मानव जीवन के लिए रामबाण औषधि है, जो हमें शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ जीवन जीने में सहायक होती हैं।
शरद पूर्णिमा सर्दी के मौसम का आरंभ है और सर्दी में होने वाले रोगों से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता पैदा करने के लिए शरीर को कुछ औषधियों से तैयार किया जाता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर खाने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे शरीर सर्दी में पनपने वाले जीवाणुओं और विषाणुओं से लड़ने के लिए भी तैयार हो जाता है।
उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा स्वयं में हमारे जीवन को पूर्ण रूप से स्वस्थ रखने का संदेश देती है। शरद पूर्णिमा के चंद्रमा के सानिध्य में साधारण सा दिखने वाला आहार भी अमृत तुल्य हो जाता है, इसी प्रकार गुरु के सानिध्य में आने से शिष्य का जीवन भी परमानंद से परिपूर्ण हो जाता है। चूंकि गुरु अपने तपोबल व दिव्य ओजस्वी तरंगों से शिष्य को निरंतर पोषित करता है। इससे उस शिष्य की आध्यात्मिक उन्नति होती है और वह आत्म साक्षात्कार से परम लक्ष्य परमात्मा को प्राप्त कर लेती है।
व्यासपुर के दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में प्रवचन करतीं साध्वियां। प्रवक्ता- फोटो : स्वयं