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मेयर के जूते की ठोकर से उखड़ गई पांच दिन पहले बनी सड़क की परत

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रेलवे रोड पर जूता मारकर सड़क की गुणवत्ता देखते मेयर मदन चौहान। - फोटो : Yamuna Nagar
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शहर में नगर निगम की ओर से करवाए जा रहे विकास कार्यों में बड़ी गड़बड़ी चल रही है। नियमों को ताक पर रख कर काम किया जा रहा है। निगम ठेकेदारों की ओर से बनाई गई कई सड़क चंद दिनों में ही टूटने लगी है। जिससे साफ जाहिर होता है कि निर्माण से पहले और निर्माण के दौरान निगम अधिकारियों ने इस तरफ आंखें मूंद रखी हैं। तभी करोड़ों की बनी सड़क की बजरी चंद रोज में बिखरने लगी। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बुधवार को नगर निगम मेयर मदन चौहान ने साढ़े चार करोड़ की लागत से बनी रेलवे रोड पर जब जूते से ठोकर मारी तो वहां से बजरी निकलने लगी। जिसके बाद मेयर ने अधिकारियों को मौके पर बुलाया और सड़क के नमूने लेने के आदेश दिए। वहीं इसके अलावा कई जगह जब जांच की गई तो सड़क की बजरी निकलने लगी।
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रेलवे स्टेशन चौक से वाया फव्वारा चौक बस स्टैंड यमुनानगर तक सड़क का निर्माण करने का 13 अगस्त 2018 को टेंडर अलॉट किया गया था। संबंधित ठेकेदार को यह टेंडर चार करोड़ 45 लाख रुपये में दिया गया था। इसके बाद सड़क पर दोनों ओर से निर्माण किया गया। लेकिन सड़क निर्माण के बाद बजरी उखड़ने लगी। बुधवार को मेयर मदन चौहान, वार्ड नंबर सात के पार्षद राम आसरा के साथ जब नगर निगम कार्यालय के बाहर निकले तो सड़क पर बजरी उखड़ी हुई देखी। दोपहर के समय मेयर चौहान व पार्षद राम आसरा गुणवत्ता देखने के लिए रेलवे रोड पर पहुंचे। यहां उन्होंने अपने पांव से जूते को सड़क पर मार कर देखा तो सड़क से बजरी उखड़ लगी। मेयर चौहान ने तुरंत संबंधित अधिकारियों को सड़क के सैंपल लेकर गुणवत्ता जांचने के निर्देश दिए। इस संबंधित में एक पत्र नगर निगम कमिश्नर को भी लिखा गया। मेयर चौहान ने निर्देश दिए कि यदि सड़क की गुणवत्ता सही नहीं मिली तो संबंधित ठेकेदार की अदायगी नहीं की जाए।
इससे पूर्व भी अमर उजाला ने एक सड़क के निर्माण में हुई गड़बड़ी को लेकर खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। जिसके बाद मेयर ने संज्ञान लेते हुए ठेकेदार का भुगतान रोक दिया था। वहीं ठेकेदार को निर्देश दिए गए थे कि वह सयमानुसार पूरी गुणवत्ता के साथ सड़क का पुन: निर्माण करेगा। लेकिन बावजूद इसके अभी तक न तो ठेकेदार न वह सड़क पूरी की है और न ही इस पर चल रहा इंटरलॉकिंग का निर्माण रुका।
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सड़क निर्माण में धांधली एक बड़ी मिलीभगत के कारण चल रही है। इसमें बॉटम टू टॉप मिले हैं। यही कारण है कि जितनी जल्द सड़क का निर्माण होता है उतनी ही जल्दी सड़क बिखर जाती है। चूंकि अधिकारी इस ओर आंखें मूंदे बैठे हैं। सड़क निर्माण से पूर्व नगर निगम के इंजीनियर्स को इसका निरीक्षण करना होता है और इसके नमूने लेने होते हैं। नमूने पास होने के बाद ही निर्माण पूरा किया जाता है।
नियमानुसार तारकोल व सीमेंट सड़क या अन्य किसी सड़क के निर्माण से पूर्व सैंपल लिए जाते हैं। इस दौरान निर्माण में प्रयोग होने वाली सामग्री, मिश्रण सामग्री सहित अन्य का नमूने लेने होते हैं। इनके पास होने के बाद ही निर्माण किया जाता है। इन सड़कों के निर्माण से पूर्व सैंपल लिए ही नहीं गए। चूंकि अधिकारी इसका सीधा लाभ ठेकेदारों को पहुंचाना चाहते हैं।
अमर उजाला में तीन दिन में उखड़ी 33.33 लाख से बनी सड़क शीर्षक से खबर प्रकाशित होने पर मेयर ने संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की। मेयर ने अधिकारियों को सड़क के सैंपल लेने के आदेश दिए। बता दें कि
मेयर मदन चौहान ने 33.33 लाख की लागत से वार्ड नंबर-15 की न्यू हमीदा कॉलोनी में रेलवे रोड से ओपी जिंदल पार्क तक (लक्ष्मी सिनेमा रोड) की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। कुछ दिनों पहले मेयर चौहान ने इस सड़क के सैंपल लेने के आदेश दे, ठेकेदार का भुगतान रोकने को कहा था।
नवनिर्मित रेलवे रोड की गुणवत्ता जांचने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए है। रिपोर्ट आने पर यदि गुणवत्ता सहीं नहीं मिलती तो ठेकेदार का भुगतान रोक दिया जाएगा। मदन चौहान, मेयर
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