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Yamuna Nagar News: धनतेरस, दिवाली लिए सजे बाजार, व्यापारियों में उत्साह

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कोरोना संक्रमण के बाद से बर्तन बाजार में चल रही मंदी के इस बार व्यापारियों को छंटने की उम्मीद है। त्योहार पर ग्राहकों के स्वागत के लिए बाजार पूरी तरह तैयार हो गए हैं। वहीं जगाधरी की बर्तन नगरी में इसे लेकर विशेष तैयारियां व उत्साह देखने को मिल रही हैं। इस बार उद्यमियों व व्यापारियों को धनतेरस व दिवाली से काफी आस है। हालांकि 2020 के बाद से बर्तन बाजार में मंदी चल रही है। जिस कारण उद्यमियों व व्यापारियों में भारी निराशा हैं। परंतु इस बार व्यापारियों को पिछले सालों की तुलना में अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है। व्यापारियों का मानना है कि दिवाली माह के दूसरे सप्ताह में पड़ी है। चूंकि नौकरीपेशा व अन्य काम करने वाले लोगों को तब तक वेतन मिल जाता है और ऐसे दिनों में त्योहार आने पर लोग खरीदारी भी अच्छी करते हैं। इस बार भी ऐसा ही माह की दस तारीख तक सभी नौकरीपेशा, फैक्टरी श्रमिकों, कारपोरेट, कंपनी इत्यादि में काम करने वालों को वेतन मिल जाता है।
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जगाधरी में लगभग 1000 सूक्ष्म, लघु और मध्यम धातु इकाइयां हैं। जिसमें स्टेनलेस स्टील, एल्युमीनियम, पीतल और तांबे के बर्तन बनते हैं। यहां के बर्तन उद्योगों के लिए दिल्ली का सदर सबसे बड़ा बाजार है। व्यापार का 60 फीसदी हिस्सा सदर बाजार पर टिका हुआ है। इस बार नवरात्र, दशहरा के साथ धनतेरस व दिवाली के लिए दिल्ली के सदर बाजार सहित देश के अन्य बड़े शहरों से थोक के बड़े ऑर्डर मिले हैं। दूसरे राज्यों से मिले ऑर्डर सभी उद्यमियों ने पूरा करके भिजवा दिया है। अन्य सालों की अपेक्षा इस बार करीब करीब 40 प्रतिशत ऑर्डर ज्यादा मिले हैं।



बिलासपुर के पास हर साल लगने वाले कपालमोचन मेले से जगाधरी बर्तन उद्योग को संजीवनी मिलती है। करीब एक सप्ताह चलने वाले इस मेले में आठ से दस लाख लोग आते हैं। अनुमान है कि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या दस से 12 लाख तक हो सकती है। मान्यता है कि मेले से जाते समय बर्तन लेकर जाना बेहद शुभ होता है। इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालु हर साल मेले में और जगाधरी बाजार से जमकर खरीददारी करते हैं। उद्यमी एवं व्यवसायी अनिल अरोड़ा, सुभाष अरोड़ा, राकेश कुमार, देवेंद्र सिंह ने बताया कि मान्यता है कि मेले से किसी धातु का बर्तन खरीद कर ले जाना होता है, जिससे घर में सुख समृद्धि आती है। उद्यमियों का कहना है कि कपालमोचन मेले से अकेले बर्तनों का आठ से 10 करोड़ रुपये का व्यापार होता है। इससे दुकानदारों का सारा स्टॉक खत्म हो जाता है।
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दी जगाधरी मैटल मैन्यूफैक्चरर्स एंड स्लायर्स एसोसिएशन के महासचिव सुंदरलाल बतरा ने बताया कि इस बार त्योहारी सीजन में उद्यमियों व व्यापारियों को भारी आस है। कोरोना संक्रमण के बाद बाजार को इस बार मंदी से निजात मिलती दिखाई दे रही है। दूसरे राज्यों से भी इस बार उद्यमियों को अच्छे ऑडर्स मिले हैं। वहीं बाजार में भी अभी से रौनक है, ऐसे में व्यापारियों को इसे लेकर काफी उत्साह है।


बर्तन व्यवसायी सुभाष अरोड़ा ने बताया कि इस बार पिछले सालों की अपेक्षा काफी हद तक ठीक प्रतीत हो रही है। मेटल उद्योग कोरोना संक्रमण के बाद से मंदी झेल रहा है। इस बार बाजार में काफी उछाल देखने को मिल रहा है। दूसरे राज्यों से भी नगरी की इकाईयों को सही रूझान मिला है। बाजार में भी दुकानदारों पर भी काफी रौनक है। इससे कारोबारियों में उत्साह है। इस बार करीब सात से दस करोड़ रुपये स्थानीय बाजार से व्यापार की उम्मीद है।
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