यमुनानगर। नवरात्र शुरू होते ही देवी स्थलों और मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। ऐसे में बिलासपुर के भगवानपुर गांव में स्थित प्राचीन मंत्रा देवी मंदिर में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा है। शिवालिक की पहाड़ी पर 150 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर समिति के पदाधिकारियों की मानें तो यहां देवी मां मंत्रों से प्रकट हुईं, इसलिए मंदिर का नाम मंत्रा देवी है। यह देवी मां का विश्राम स्थल है, जहां वो मां चंडी रूप में विराजमान हैं। हर साल चैत्र व शारदीय नवरात्र पर हरियाणा सहित पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
उन्होंने बताया कि मंदिर में लगातार 23 वर्षों से देसी घी की अखंड ज्योति जल रही है। अखंड ज्योति सहित मंदिर परिसर में माता मंत्रा देवी, ललिता देवी, भगवान शिव और हनुमान मंदिर के सेवा व पूजन कार्यों में पुजारी लगे हैं। मंदिर के रास्ते में ध्यानु भगत का मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। श्री माता मंत्रा देवी मंदिर समिति के प्रधान डॉ. बरखा राम ने बताया कि मंदिर परिसर में 27 वर्षों से नवरात्र में अष्टमी पर भंडारा लग रहा है। भंडारे की शुरुआत में एक हजार लोग थे, पर बीते एक दशक से अष्टमी के भंडारे में करीब पांच हजार श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इस बार भी अष्टमी पर 16 अप्रैल को सुबह 11.30 से शाम पांच बजे तक भंडारे में कढ़ी, चावल, पूरी, आलू-छोले, कद्दू, जलेबी व चाय का प्रसाद वितरित होगा। अष्टमी पर भंडारे से पूर्व यहां कन्या पूजन भी विशेष अंदाज में होता है। मंदिर में जितनी भी कन्याएं पहुंचती हैं, उनका बैंड बाजे के साथ स्वागत व पूजन होता है। उन्हें भोजन कराने के साथ चुनरी व अन्य उपहार भी दिए जाते हैं। इस तरह करीब 150 कन्याओं का पूजन होता है।