कोरोना कॉल में साइकिलिंग के प्रति बढ़ा लोगों का रुझान भेले कम हो गया है, पर आज भी कई लोगों में साइकिलिंग के प्रति दीवानगी सिर चढ़ बोल रही है। उन्हीं में से एक आईएमए के स्टेट सेक्रेट्री एवं डेंटल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. धीरेंद्र सोनी हैं। जो 60 की उम्र में भी रोज औसत 50 किमी. साइकिलिंग कर दूसरों के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं। डॉ. सोनी ने बताया कि कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन में साइकिलिंग शुरू की थी। तब से अब तक रोज सुबह साढ़े चार से पांच बजे के बीच साइकिल लेकर घर से निकलते हैं। शुरुआत में रोज पांच से दस किमी. तक साइकिल चलाई। इसमें धीरे-धीरे किमी. बढ़ाते गए, जो अब बढ़कर रोज के औसत 50 किमी. तक है। जिसके लिए रोज सुबह साढ़े चार से पांच बजे के बीच दो से ढाई घंटे तक लगातार साइकिल चलाते हैं। ऐसा करते हुए वह रोज शहर से बाहर निकल जाते हैं और साढ़े सात बजे घर लौट नौ बजे कॉलेज पहुंच जाते हैं। इस तरह ढाई साल में वह 60 हजार किमी. साइकिलिंग कर चुके हैं।
डॉ. सोनी ने बताया कि साइकिलिंग शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रखती है। एक घंटे तक मध्यम रफ्तार पर साइकिल चलाने पर भी 550 तक कैलोरी बर्न हो सकती है। इससे आपके हृदय, रक्त वाहिकाओं व फेफड़ों का आसानी से व्यायाम हो जाता है। जिन लोगों का वजन अधिक है, उनके लिए साइकिलिंग अतिरिक्त फैट को कम करने में काफी मददगार है। इस तरह शरीर तंदुरुस्त रहेगा, जिससे मानसिक स्तर पर भी आप खुद का स्वस्थ महसूस करेंगे। साइकिलिंग करते रोज नए रास्तों पर सुबह प्रकृति के अनोखे नजारे देखने से भी मानसिक स्तर पर मजबूती मिलती है।