संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के 115वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति के सानिध्य में खद्दरधारिनी साध्वी मथुरा देवी की 78वीं पुण्यतिथि पर कार्यक्रम हुआ। साध्वी सुप्रिया ने श्रद्धालुओं से कहा कि मथुरा देवी का जीवन बड़ा गौरवपूर्ण व उज्जवल रहा। उन्होंने अनेक कष्टों को झेलकर अपने पद संयम की ओर बढ़ाए।
वह त्याग व समता की प्रतिमूर्ति थीं। एक बार उनकी आंखों में असहनीय पीड़ा हो रही थी, जिस पर उन्हें तो कोई चिंता नहीं थी लेकिन उनके शिष्य जनों ने उन्हें डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने बोला उनकी आंखें निकालनी पड़ेंगी और इसके लिए हमें इन्हें अस्पताल लेकर जाना पड़ेगा। लेकिन उन्होंने कहा कि मैं न तो अस्पताल जाऊंगी और न ही बेहोशी का इंजेक्शन लगाऊंगी। मेरा जो भी इलाज होगा, वह स्थानक में ही होगा और पूरे होशो-हवास में होगा। डॉक्टर ने बिना बेहोश किए ऑपरेशन किया और गुरुनी जी ने उफ तक नहीं की।
साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने भी गुरुनी जी के जीवन के बारे में बताया। कहा कि जब मथुरा देवी 12 वर्ष की थीं, तो बाल विवाह प्रथा के अनुसार उनका विवाह कर दिया गया था। लेकिन विधि को कुछ और ही मंजूर था। छोटी सी उम्र में ही उनके पति का स्वर्गवास हो गया था। इस घटना से उनको वैराग्य उत्पन्न हो गया और जब उन्होंने ससुराल वालों से दीक्षा की आज्ञा मांगी तो वह क्रोधित हो गए। उन्होंने मथुरा देवी को कष्ट देने शुरू कर दिए।