संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एलईडी टीवी में खराबी के मामले में विक्रेता गर्ग मोटर्स और सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड को नया एलईडी टीवी देने का आदेश दिया है। आयोग ने 45 दिनों के भीतर खराब टीवी बदलने और शिकायतकर्ता को 2500 रुपयेमानसिक प्रताड़ना व मुकदमेबाजी खर्च देने के निर्देश दिए। आदेश का पालन न करने परनौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।
सहायक रजिस्ट्रार नीरज वालिया ने बताया कि गांव भगवानगढ़ निवासी राजेश कुमार ने आयोग में शिकायत में बताया था कि उन्हें अच्छी गुणवत्ता का एलईडी टीवी खरीदना था। वह जगाधरी रोड स्थित गर्ग मोटर्स के शोरूम पहुंचे। वहां उन्हें सैमसंग कंपनी का एलईडी टीवी खरीदने के लिए कहते हुए उसके फायदे बताए गए। राजेश ने 24 अक्टूबर 2024 को 32,500 रुपये में एलईडी टीवी खरीदा। एलईडी भी विक्रेता की ओर से उनके घर पर लगवाई गई। शुरुआत में टीवी ठीक चलता रहा, लेकिन कुछ समय बाद स्क्रीन पर दो लाइनें आने लगीं और तस्वीर की गुणवत्ता खराब हो गई। उन्होंने इस संबंध में कई बार विक्रेता को शिकायत दी, लेकिन न तो कोई कर्मचारी जांच के लिए पहुंचा और न ही खराबी दूर की गई।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने तीन अक्टूबर 2025 को कानूनी नोटिस भी भेजा।लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिला। मजबूरन पीड़ित की तरफ से उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दी। आयोग की ओर से नोटिस जारी होने के बावजूद गर्ग मोटर्स आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। इसके चलते आयोग ने उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई शुरू कर दी।
वहीं सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड ने जवाब दाखिल करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने कंपनी के अधिकृत सेवा केंद्र में कभी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि वारंटी केवल मरम्मत तक सीमित थी और विक्रेता कंपनी का अधिकृत सेवा प्रदाता नहीं था। आयोग ने कंपनी के इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि रिकॉर्ड पर पेश किया गया वारंटी कार्ड अधूरा और खाली था। यदि विक्रेता अधिकृत नहीं था तो चालान पर सैमसंग का नाम और अधिकृत प्रतिनिधि की मुहर कैसे लगी। आयोग ने माना कि जब उत्पाद सैमसंग द्वारा निर्मित था और वारंटी अवधि के भीतर शिकायत की गई थी, तो कंपनी की जिम्मेदारी बनती थी कि वह उपभोक्ता की शिकायत का समाधान करती।
आयोग ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता के कानूनी नोटिस का जवाब नहीं देना और शिकायत के बावजूद कोई तकनीकी जांच न करना सेवा में स्पष्ट कमी और लापरवाही को दर्शाता है। आयोग ने माना कि विपक्षी पक्षों की निष्क्रियता के कारण शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी, आर्थिक नुकसान और अनावश्यक मुकदमेबाजी झेलनी पड़ी। फैसले में आयोग ने आदेश दिए कि शिकायतकर्ता पुराना खराब एलईडी टीवी लौटाएगा, जिसके बाद विपक्षी पक्ष उसे नया एलईडी टीवी उपलब्ध कराएंगे। साथ ही 2500 रुपये मुआवजा राशि भी अदा करनी होगी। आयोग ने स्पष्ट किया कि आदेश का अनुपालन 45 दिनों में नहीं होने पर शिकायतकर्ता ब्याज पाने का भी हकदार होगा। आयोग ने साफ किया है कि निर्माता और विक्रेता दोनों उपभोक्ता के प्रति जवाबदेह हैं और शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।