Lakshmi and her group of friends became the center of attraction in Ban Santor
- फोटो : Yamuna Nagar
छछरौली। चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र बन संतौर में लक्ष्मी एंड फ्रेंड की टोली इन दिनों जमकर मस्ती कर रही है जो कि पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। वहीं सर्दियों में डाइट में पांचों हथिनियों का खास ख्याल रखा जा रहा है। इसके साथ महावत टारगेट प्रैक्टिस भी कराते हैं। छछरौली से 10 किमी की दूरी पर घाड़ क्षेत्र के बन संतौर में बनाए गए चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र में लक्ष्मी, लीली, चंचल, जया व जैस्मिन पांचों हथिनियां सर्दी में धूप सेंकती हुई नजर आ रही हैं। धूप सेकते हुए महावत द्वारा नील ट्रीमिंग का कार्य भी फुरसत से किया जा रहा है।
सर्दियों में पांचों हथिनी या खुले मैदान में दिन में धूप सेंकती है, जबकि गर्मियों में जंगल के अंदर पेड़ों की छांव में चली जाती है। हाथी पुनर्वास केंद्र में पांचों हथिनियों की देखभाल के लिए पांच महावत नियुक्त किए हुए हैं। महावत के द्वारा ही हथिनी के रुटीन कार्य कराए जाते हैं।
सर्दियों में दी जाने वाली डाइट
सर्दियों में हाथियों को स्पेशल डाइट दी जाती है। जिसमें यह ध्यान रखा जाता है कि सर्दी के मौसम में हाथियों का डाइजेस्ट सिस्टम भी सही रहे और उनको जो डाइट दी जा रही उसमें गर्म चीजें भी दी जाती है। जिससे सर्दी का असर भी उनके ऊपर न हो। प्रत्येक हथिनी को डाइट में दो क्विंटल 50 किलो गन्ना, खिचड़ी जिसमें बाजरा और तिल का तेल मिक्स किया जाता है। इसके साथ हथिनियों को सर्दी में गुड़ व अदरक व अन्य जड़ी बूटियों से तैयार की गई डाइजेस्ट सामग्री भी दी जाती है। जिससे उनकी डाइजेशन सिस्टम और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।
नील ट्रीमिंग और तिल के तेल से होती है मालिश
हथिनियों की देखभाल कर रहे महावतों ने बताया कि रोजाना हथिनियों की नील ट्रीमिंग की जाती है। जो बहुत ही जरूरी होती है। उसके बिना हाथी का खड़े होना और चल पाना बहुत ही मुश्किल होता है। नील ट्रीमिंग कार्य में हाथी के पैर के जो नाखून होते हैं। उनको आगे से घिसा जाता है ताकि खड़े होते व चलते समय नाखून मिट्टी या पत्थर से न टकराए। हाथी का पूरा सिस्टम उसके पैरों के ऊपर ही निर्भर होता है। नाखूनों को घिसकर सही सेप दी जाती है ताकि उसको खड़े होने और चलने में कोई दिक्कत न आए। नील ट्रीमिंग करने का मुख्य कारण यह भी है कि हाथी के शरीर का जो भार है वह नाखूनों पर न पड़कर उसके पैर के पिछले हिस्से पर रहे।