संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे व्यासपुर स्थित केदारनाथ मंदिर द्वापर युग से से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में सावन माह, महाशिवरात्रि और हर सोमवार को हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित आसपास के राज्यों से भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं।
मंदिर के पुजारी राजेश्वर शास्त्री के अनुसार आदिबद्री क्षेत्र में स्थित यह शिवलिंग लगभग 5200 वर्ष प्राचीन माना जाता है और इसे द्वापर युग से जुड़ा बताया जाता है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया था।
मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है और यहां किया गया जलाभिषेक विशेष पुण्यदायी माना जाता है। मंदिर में पूजा-अर्चना का क्रम पूरे वर्ष जारी रहता है, लेकिन महाशिवरात्रि और सावन में विशेष आयोजन किए जाते हैं। पुजारी के अनुसार मंदिर में चारों पहर की आरती की परंपरा है। पहला पहर रात नौ बजे, दूसरा पहर मध्यरात्रि बारह बजे, तीसरा पहर ढाई बजे और चौथा पहर सुबह चार बजे पूजा-अर्चना की जाती है।
इसके अलावा सुबह और शाम नियमित आरती होती है। शाम के समय भगवान शिव का विशेष श्रृंगार कर महाभस्मा आरती और भजन संध्या आयोजित की जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और सजावट से सुसज्जित किया जाता है। इस दिन भव्य आयोजन और मेले का भी आयोजन होता है।
श्रद्धालु सुबह तीन बजे से ही मंदिर पहुंचना शुरू कर देते हैं और पूरे दिन दर्शन का सिलसिला जारी रहता है। मंदिर प्रशासन की ओर से भक्तों के लिए पूजन सामग्री की व्यवस्था की जाती है और भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए जाते हैं।
पुजारी के अनुसार यहां श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मनुष्य के जीवन का कल्याण होता है और अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है।
महाशिवरात्रि की तैयारी में जुटे कमेटी के सदस्य। संवाद