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Yamuna Nagar News: ट्रेन से कारसेवकों को जबरन उतारकर पुलिस ने बरसा दी थीं लाठियां

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- 20 साल की उम्र में कारसेवा करने गए दीपक गुप्ता ने 12 दिन जेल में बिताए थे
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- बोले- वर्षों बाद रंग ला रहा संघर्ष, श्रीराम लला को विराजमान होता देखने की है उत्सुकता
पंकज बत्रा
बिलासपुर। अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर की कारसेवा के लिए जाते वक्त सभी भक्तों ने ट्रेन को फूलों से सजाया था। तब यह नहीं पता था की जो लोग कारसेवा में जा रहे हैं उन पर पुलिस गोलियां भी बरसेगी और उन्हें लाठियों से पीटा जाएगा। हम भी 50 कार सेवक अयोध्या जा रहे थे। पुलिस ने जबरन कारसेवकों की ट्रेन को इटावा में रोक लिया था। वहां पुलिस कार सेवकों पर लाठियां बरसा रही थी।
उनके जत्थे को भी ट्रेन से नीचे उतरने को कहा गया, जो कि अयोध्या जाने की जिद पर अड़ा हुआ था, उन्हें लाठी मार कर डराया जा रहा था। उनके जत्थे में भी कई कारसेवकों को पुलिस की लाठी पड़ी। पुलिस ने हम सभी को पकड़ कर जेल में डाल दिया।
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यह आपबीती बिलासपुर के कारसेवक 50 वर्षीय दीपक गुप्ता ने सुनाई। उनके अनुसार आज राम मंदिर बनने से वह खुश हैं। 22 जनवरी के बाद वह भी नवनिर्मित मंदिर में भगवान श्री राम लला के दर्शन करने के लिए जाएंगे। दीपक गुप्ता ने बताया कि अयोध्या में प्रभु श्री राम लला विग्रह प्राण प्रतिष्ठा समारोह काे लेकर पूरे देश के भक्तों में भारी उत्साह है। वर्षों बाद कार सेवकों का संघर्ष रंग ला रहा है। 20 साल की उम्र में वह भी वर्ष 1990 में अपने ताया सुमेर चंद, जागरत प्रशाद, सुभाष व अन्य साथियों के साथ अयोध्या के लिए रवाना हुए थे। अयोध्या जाने से पहले बहुत जोश व उत्साह था।
क्षेत्र के प्रत्येक गांव के लोगों को राम मंदिर में कारसेवा के लिए उत्सुकता थी। उनके साथ बिलासपुर, छछरौली, साढौरा व जगाधरी के कार सेवक शामिल थे। 50 कार सेवकों का जत्था अयोध्या के लिए रवाना हुआ। सभी सदस्यों को कहा गया कि एक साथ रहें। ट्रेन को फूलों से सजाया गया। कार सेवकों को लोगों का हजूम स्टेशन तक छोड़ने के लिए पहुंचा था। जब कार सेवकों की ट्रेन इटावा पहुंची तो ट्रेन को रूकवा दिया गया। सभी कार सेवकों को नीचे उतार दिया गया। कुछ देर के पश्चात बसों में बिठा कर कानपुर की जेल में बंद कर दिया गया।
दीपक गुप्ता ने बताया कि उनका जत्था कानपुर की जेल में 12 दिन तक बंद रहा था। पहले दिन उन्हें सामान्य कैदियाें की तरह खाना परोसा गया। जिस पर कार सेवकों ने पहले दिन तो खाना खा लिया, लेकिन दूसरे दिन उन्हाेंने जेल में बना खाना खाने से मना कर दिया। स्वयं खाना बना कर खाने की मांग की गई। जिस पर उन्हें जेल में राशन दिया गया, जहां कार सेवकों ने स्वयं खाना बना कर खाया।
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कानपुर जेल में रहने के बाद कस्बा बिलासपुर में पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने मुख्य बाजार में भव्य समारोह आयोजित कर श्री राम मंदिर संघर्ष में शामिल होने वाले कार सेवकों का फूला मालाएं पहना व लड्डू खिलाकर स्वागत किया था। उनका कहना है कि वर्षों बाद कारसेवकों का संघर्ष रंग ला रहा है, इसलिए अब अयोध्या में श्रीराम लला को विराजमान होता देखने के लिए खासी उत्सुकता बनी हुई है।
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