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कपाल मोचन : कर्मियों की लगाई ड्यूटियां, हर प्रवेश द्वार पर होगी पार्किंग

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अंतरराज्यीय तीर्थराज कपाल मोचन मेले के आरंभ होने में सप्ताह शेष रह गया है। वहीं प्रशासन भी मेले की तैयारियों में पूरी तरह से जुटा पड़ा है। यहां बने कपालमोचन, ऋण मोचन व सूरज कुंड सरोवरों की सफाई कराई जा चुकी है। इनमें ऋण मोचन सरोवर में वीरवार को पानी भर दिया गया है। उधर मेले को लेकर प्रशासन की तरफ से कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई जा रही है। करीब तीन हजार सिविल कर्मचारी यहां ड्यूटी करेंगे। लेकिन इस दौरान अगर किसी कर्मचारी को छुट्टी चाहिए होगी तब उन्हें ठोस कारण बताने के बाद ही छुट्टी मिलेगी। वहीं इस मेले में करीब तीन हजार पुलिसकर्मी भी तैनात रहेंगे।
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अंतरराज्यीय श्री तीर्थराज कपाल मोचन मेला इस बार 23 से 27 नवंबर तक भरेगा। वहीं इस बार दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं की मेले में पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं मेले में आने वाले जितने भी सात से आठ एंट्री गेट हैं सभी जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा मेले में लगने वाली दुकानों का स्थाई शेड्यूल भी अलग से बना दिया गया है। ऐसे में सड़क किनारे हाेर्डिंग लोहे की चारपाई नहीं लगने दी जाएगी। ताकि श्रद्धालुओं को मेला परिसर तक आने के लिए परेशानियों का सामना न करना पड़े।



स्कंद महापुराण के अनुसार कलयुग के प्रभाव से ब्रह्मा अपनी पुत्री सरस्वती के प्रति मन में बुरे विचार रखने लगे। इससे बचने के लिए सरस्वती ने द्वैतवन में भगवान शंकर से शरण मांगी। सरस्वती की रक्षा के लिए भगवान शंकर ने ब्रह्मा का सिर काट दिया, जिससे उन्हें ब्रह्मा हत्या का पाप लगा। इससे शंकर भगवान के हाथ में ब्रह्मा कपाली का निशान बन गया। सब तीर्थों में स्नान और दान करने के बाद भी वह ब्रह्मा कपाली का चिन्ह दूर नहीं हुआ। घूमते-घूमते भोलेनाथ पार्वती सहित सोमसर (कपाल मोचन) तालाब के निकट देव शर्मा नामक एक ब्राह्मण के घर ठहरे। किवदंती के अनुसार रात के समय ब्राह्मण देव शर्मा के आश्रम में गाय का बछड़ा गौ माता से बात कर रहा था कि सुबह ब्राह्मण उसे बधिया करेगा। इससे क्रोधित बछड़े ने कहा कि वह ब्राह्मण की हत्या कर देगा। इस पर गौ माता ने बछड़े को ऐसा करने से मना कर दिया, क्योंकि बछड़े को ब्रह्मा हत्या का पाप लग जाता। इस पर बछड़े ने गौ माता को ब्रह्मा हत्या दोष से छुटकारा पाने का उपाय बताया। दोष मुक्त होने के उपाय मां पार्वती ने भी सुने। दूसरे ही दिन सुबह होने पर ब्राह्मण ने बछड़े को बधिया करने का कार्य शुरू किया और बछड़े ने ब्राह्मण की हत्या कर दी, जिससे उसे ब्रह्मा हत्या का पाप लग गया। बछड़े और गाय का रंग काला हो गया। इससे गौ माता बहुत दुखी हुई। इस पर बछड़े ने गौ माता को अपने पीछे आने को कहा और दोनों सोमसर तालाब में स्नान किया, जिससे उनका रंग पुन: सफेद हो गया। इस प्रकार वे ब्रह्म दोष से मुक्त हो गए।
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मेले को लेकर प्रशासन की तरफ से तैयारियां जोरों पर चल रही है। कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई जा रही हैं। केवल ठोस कारण पर कर्मचारी को छुट्टी दी जाएगी। मेले में लगभग तीन हजार सिविल में कर्मचारी तैनात रहेंगे। दूसरा हर साल तीन हजार अलग पुलिसकर्मी भी व्यवस्था के लिए तैनात रहते हैं। इस बार भी रहेंगे।
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-जसपाल सिंह गिल, एसडीएम बिलासपुर।
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