संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। श्री सनातन धर्म मंदिर मॉडल टाउन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भक्त प्रह्लाद प्रसंग का बखान किया गया। कथा व्यास चित्रकूट से आए आचार्य कमलेश शास्त्री महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को धर्म व आध्यात्म का ज्ञान देना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि भक्त प्रह्लाद ने माता कयाधु के गर्भ में ही नारायण नाम का मंत्र सुना था। जिसके सुनने मात्र से भक्त प्रह्लाद के कई कष्ट दूर हो गए थे। बच्चों को धर्म का ज्ञान बचपन में दिया जाए तो वह जीवन भर उसका ही स्मरण करते हैं। ऐसे में बच्चों को धर्म व आध्यात्म का ज्ञान दिया जाना चाहिए। माता-पिता की सेवा व प्रेम के साथ समाज में रहने की प्रेरणा ही धर्म का मूल है। अच्छे संस्कारों के कारण ही ध्रुव जी को पांच वर्ष की आयु में भगवान का दर्शन प्राप्त हुआ।
इसके साथ ही उन्हें 36 हजार वर्ष तक राज्य भोगने का वरदान प्राप्त हुआ था। ऐसी कई मिसाल हैं, जिससे सीख लेने की जरूरत है। जब-जब कोई अपने गलत कर्मों द्वारा इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है तब-तब भगवान इस धरा धाम पर अवतार लेकर सज्जनों का उद्धार और दुर्जनों का संहार किया करते हैं।
समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए आचार्य कमलेश शास्त्री ने कहा कि मानव हृदय ही संसार सागर है। मनुष्य के अच्छे और बुरे विचार ही देवता और दानव के द्वारा किया जाने वाला मंथन है।
कभी हमारे अंदर अच्छे विचारों का चिंतन मंथन चलता रहता है और कभी हमारे ही अंदर बुरे विचारों का चिंतन मंथन चलता रहता। आचार्य ने बताया कि जिसके अंदर के दानव जीत गया उसका जीवन दु:खी, परेशान और कष्ट कठिनाइयों से भरा होगा। जिसके अंदर के देवता जीत गया उसका जीवन सुखी, संतुष्ट और भगवत प्रेम से भरा हुआ होगा। मनमोहक भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे।
कथा को जीवन में धारण करें : अरोड़ा
कथा सुनने पहुंचे यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने कहा कि कथा सुनने का फायदा तभी है जब हम इसमें सुनी बातों को अपने जीवन में धारण करें। इन कथाओं के माध्यम से ही हमें भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत ज्ञान की प्राप्ति होती है। परिवार का लालन पालन करने के साथ जरूरतमंद की मदद करना व समाज के प्रति कुछ समय निकालना भी धर्म ही है।