पुलिस की अपराध अन्वेषण शाखा और एंटी व्हीकल थेप्ट सेल के सदस्यों ने
अंतरराज्यीय बाइक चोर गिरोह के चार सदस्यों को काबू कर लिया। पूछताछ के
दौरान आरोपियों से 58 बाइक बरामद की गई, जो हरियाणा और उत्तराखंड के
विभिन्न जिलों से चोरी की गई।
चोरी की गई बाइक में 28 बाइक यमुनानगर जिले
से चोरी की हैं। पुलिस ने बाइक चोर गिरोह के सदस्यों को कोर्ट में पेश
किया। जहां से सीआईए स्टाफ ने उन्हें रिमांड पर लिया है। आरोपियों से
पूछताछ जारी है।
जिले में बढ़ रही बाइक चोरी की वारदात पर अंकुश लगाने
के लिए पुलिस अधीक्षक सिबास कविराज ने इसका जिम्मा पुलिस की सीआईए शाखा और
एंटी व्हीकल थेप्ट सेल को सौंपा।
इसमें उन्हाेंने सीआईए स्टाफ के निरीक्षक
प्रमोद कुमार के नेतृत्व में एंटी व्हीकल थेप्ट सेल के सह उप निरीक्षक रमेश
कुमार के साथ मिलकर टीम तैयार की। 13 सितंबर की देर शाम उन्हें सूचना मिली
थी कि बाइक चोर गिरोह के कुछ सदस्य बाइक चोरी की वारदात को अंजाम देकर
नेशनल हाईवे-73 से खानपुर चौक के रास्ते उत्तरप्रदेश की ओर जा रहे हैं।
सूचना मिलने पर उन्हाेंने तुरंत खानपुर चौक के पास जाकर नाकाबंदी कर जांच
करनी शुरू की।
इस दौरान उन्हाेंने दो बाइक पर चार युवक आते दिखाई दिए।
उन्हाेंने उन्हें रोककर जांच की। इसमें आरोपियों से दोनों बाइक चोरी की पाई
गई। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। जहां
कोर्ट ने आरोपियाें से गहनता से पूछताछ के लिए सीआईए को सौंपा था। पूछताछ
में आरोपियों की पहचान जिला कुरुक्षेत्र के गांव रामशरण माजरा निवासी
कुलवंत उर्फ काला, कुरुक्षेत्र के ही गांव गजलाना निवासी सुनील कुमार,
यमुनानगर के गांव हिरण छप्पर निवासी सोनू और साबापुर निवासी पवन कुमार के
रूप में हुई। पूछताछ के दौरान आरोपियों से 58 बाइक चोरी की वारदात का
खुलासा हुआ। आरोपियाें से सभी बाइक बरामद कर ली गई है। शुक्रवार को फिर
आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर रखा
गया है। सीआईए स्टाफ सदस्याें का कहना है कि आरोपियों से बाइक चोरी की अन्य
वारदातों को भी खुलासा हो सकता है। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने
यमुनानगर से सबसे अधिक 28 बाइक चोरी की। इसके अलावा उन्हाेंने अंबाला और
कुरुक्षेत्र से 28 और उत्तराखंड से दो बाइक चोरी की हैं। इन बाइक को बरामद
करने के लिए पुलिस टीम को काफी मेहनत करनी पड़ी। इन बाइक को उत्तराखंड,
कुरुक्षेत्र, मुजफ्फरनगर से बरामद कर यहां लाया गया।
ऐेसे देते थे वारदात को अंजाम
बाइक
चोर गिरोह के सदस्यों ने बताया कि वह डुप्लीकेट चाबी से बाइक की चोरी करते
थे। वारदात को अंजाम देने के लिए दो युवक साथ रहते थे। इसमें अधिकतर
अस्पताल, कॉलेज, बैंक के बाहर रेकी करते थे। जब कोई व्यक्ति बाइक खड़ी कर
जाता था। तो तुरंत बाइक के पास जाकर वारदात को अंजाम देते थे। यदि बाइक में
चाबी लग जाती थी तो वह बाइक लेकर फरार हो जाते थे। यदि चाबी नहीं लगी तो
उसे छोड़ देते थे। अधिकतर वारदात को अंजाम वह नशे में देते थे। आरोपियों का
कहना है कि जिस बाइक में चाबी लग जाती थी उसे लेकर फरार होते थे। सबसे
अधिक वह सप्लेंडर बाइक को चोरी करते थे।
बाइक के बेचते थे स्पेयर पार्ट
बाइक
चोर गिरोह के सदस्य आरोपी पवन ने बताया कि पकड़े जाने के डर से और किसी को
उन पर शक न हो इसलिए वह बाइक के सभी स्पेयर पार्ट अलग अलग खोल लेते थे।
इसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जाकर इन्हें बेचते थे। इससे
उनकी अच्छी आमदन हो जाती थी। चोरी करने के पीछे कोई मकसद नहीं था। बाइक
चोरी करते थे। पहले उसे बेचने का प्रयास करते। अगर नहीं बिकती तो उसके
स्पेयर पार्ट बेच देते। कई बार बाइक के स्पेयर पार्ट भी बदल कर बेचते थे।
सबसे बड़ी रिकवरी
डीएसपी
जगाधरी राजेश कुमार का कहना है कि आरोपियों से बरामद की गई बाइक की कीमत
18 लाख रुपये से अधिक है। जिले में किसी बाइक चोर गिरोह से यह अब तक सबसे
बड़ी रिकवरी है। जिला यमुनानगर पुलिस ने गिरोह को पकड़कर अब तक की सबसे
बड़ी सफलता हासिल की है।