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Yamuna Nagar News: जेसीबी चोरी के मामले में बीमा कंपनी को 20 लाख का क्लेम देने का आदेश

Tue, 31 Mar 2026 03:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने जेसीबी चोरी के मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 20 लाख रुपये का क्लेम अदा करने का आदेश दिया हैं। आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए ये निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि बीमा कंपनी को सभी आवश्यक दस्तावेज जमा होने के 45 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। यदि निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं किया गया तो कंपनी को आदेश की तिथि से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
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जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ननौवाला निवासी दविंद्र कुमार ने अपनी जेसीबी मशीन का बीमा कराया हुआ था, जिसकी बीमित राशि 20 लाख रुपये थी। अक्टूबर 2021 में यह जेसीबी उसके निवास के बाहर से चोरी हो गई। शिकायतकर्ता ने प्राथमिकी दर्ज कराने के साथ बीमा कंपनी को भी समय पर सूचित करते हुए सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कराए। इसके बाद भी बीमा कंपनी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी ने आरोप लगाया कि वाहन को बिना उचित सुरक्षा के सड़क पर खड़ा किया गया था, जिससे पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन हुआ है। साथ ही चोरी की घटना को संदिग्ध बताते हुए गलत जानकारी देने का भी आरोप लगाया गया। आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस जांच में चोरी की घटना सही साबित हुई और जेसीबी का कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस की ओर से दायर अनट्रेस रिपोर्ट को न्यायालय ने भी स्वीकार किया था। आयोग ने स्पष्ट कहा कि केवल इस आधार पर कि वाहन सड़क पर खड़ा था, बीमा क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। संवाद

कंपनी का रवैया उपभोक्ता के प्रति लापरवाही को दर्शाता
आयोग ने यह भी माना कि बीमा कंपनी अपने रिपुडिएशन लेटर में दिए गए कारणों से आगे बढ़कर नए तर्क नहीं दे सकती। कंपनी का यह रवैया उपभोक्ता के प्रति लापरवाही और सेवा में कमी को दर्शाता है। फैसले में आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिए कि वह शिकायतकर्ता को जेसीबी की बीमित राशि 20 लाख रुपये का भुगतान करे। इसके अलावा मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 11 हजार रुपये अतिरिक्त देने के भी आदेश दिए गए हैं। उधर, आयोग के अस्सिटेंट रजिस्ट्रार नीरज वालिया ने बताया कि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता को क्लेम राशि प्राप्त करने से पहले शपथ पत्र (सब्रोगेशन लेटर) और आरसी रद्द करने का प्रमाण पत्र बीमा कंपनी को देना होगा, जिसमें यह उल्लेख होगा कि वह क्लेम राशि प्राप्त करने के बाद वाहन पर अपना स्वामित्व दावा नहीं करेगा।
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