संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को आयोजित सत्संग में साध्वी रबिया भारती ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, गुरु भक्ति और सदाचार का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर दूसरों की गलतियां निकालने में इतना व्यस्त हो जाता है कि उसे अपने भीतर झांकने और आत्ममंथन करने का अवसर ही नहीं मिलता।
साध्वी ने कहा कि निंदा मनुष्य के भीतर ईर्ष्या, द्वेष, अहंकार और नकारात्मकता को बढ़ावा देती है। इसके कारण व्यक्ति अपनी कमियों को पहचानने के बजाय दूसरों के व्यवहार का मूल्यांकन करने में लगा रहता है। जबकि जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल बाहरी संसार को देखना नहीं, बल्कि अपने अवगुणों को दूर कर व्यक्तित्व को श्रेष्ठ बनाना है।
उन्होंने कहा कि पूर्ण गुरु की कृपा और मार्गदर्शन में साधक अपने मन के विकारों को पहचानना सीखता है। गुरु भक्ति अहंकार, ईर्ष्या, निंदा और द्वेष जैसी प्रवृत्तियों से ऊपर उठकर आत्मिक उन्नति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। अपनी जीवन-ऊर्जा दूसरों की निंदा में व्यर्थ करने के बजाय आत्मचिंतन, सत्कर्म और लोक कल्याण में लगानी चाहिए।
साध्वी ने कहा कि स्वयं के व्यवहार, व्यक्तित्व और आचरण को बेहतर बनाना ही सच्ची साधना का आधार है। जब व्यक्ति स्वयं में सुधार लाने का प्रयास करता है, तभी परिवार, समाज और संपूर्ण मानवता में प्रेम, सद्भाव और शांति का वातावरण स्थापित हो सकता है।
साध्वी रबिया भारती।