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पराली जलाने से बढ़ रहा प्रदूषण, अगला महीना खतरनाक होगा

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जठलाना क्षेत्र में अपने खेतों में पराली जलाते किसान - फोटो : Yamuna Nagar
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पराली जलाने के मामले में सात किसानों पर रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद भी जिले के किसान पराली जलाने से नहीं मान रहे हैं। शुक्रवार को जठलाना क्षेत्र में कुछ किसानों ने अपने खेतों में पड़ी पराली और फांसों में आग लगा दी। जिसके चलते आसपास के क्षेत्र में धुआं फैल गया। हरियाणा स्पेस एप्लीकेशनस सेंटर हिसार के वैज्ञानिक सैटेलाइट के जरिए जिले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और रोजाना शाम को पूरी रिपोर्ट कृषि विभाग के अधिकारियों को भेज रहे हैं। इस रिपोर्ट में इस बात की जानकारी होती है कि कहां और किस इलाके में आग लगाई गई है। रिपोर्ट के आधार पर कृषि अधिकारी फील्ड में जाकर किसानों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।
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यमुनानगर के साथ पड़ोसी जिलों से लेकर यूपी और पंजाब में जल रही पराली के कारण प्रदूषण का स्तर शनिवार से 300 के पार जा सकता है। हवाओं का रुख बदलने से पराली का धुआं अगले एक महीने लोगों को ज्यादा परेशान करेगा। अभी तक हवाओं का रुख दूसरी ओर होने से यमुनानगर और आसपास के क्षेत्र पर बहुत अधिक असर नहीं था, लेकिन अब हवाओं का रुख बदल गया है। पंजाब में कम दबाव का क्षेत्र विकसित हुआ है। इसकी वजह से शनिवार को हल्की बूंदाबांदी की संभावना भी है। हिमाचल और उत्तराखंड के मौसम में भी बदलाव हुए हैं। इससे 24 घंटे के दौरान शहर के प्रदूषण में कुछ कमी आई है, लेकिन 19 अक्तूबर से प्रदूषण काफी बढ़ जाएगा।
एयर इंडेक्स 262
सीपीसीबी के एयर बुलेटिन के अनुसार यमुनानगर में एयर इंडेक्स 262 रहा। करनाल में यह 241, पानीपत का 269, दिल्ली में 304 और गुरुग्राम में 279 दर्ज किया गया। मौसम विभाग चंडीगढ़ के मुताबिक चार-पांच दिनों से उत्तर-पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में हल्की हवाएं चल रही हैं। पराली जलने के कारण धुएं के कण हवाओं के साथ मिल रहे हैं। सीपीसीबी के पूर्वानुमान के अनुसार 72 घंटों के दौरान पराली के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं।
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रिहायशी इलाकों में चल रही फैक्टरियां
जगाधरी की रिहायशी कॉलोनियों में मेटल के काम की छोटी-छोटी फैक्ट्रियां चल रही है। जिससे प्रदूषण की समस्या सबसे अधिक है, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। रिहायशी कॉलोनियों में चल रही इन फैक्ट्रियों को बंद करने के लिए दो साल पहले लिस्ट बनाई गई थी, लेकिन प्रदूषण की समस्या पर कोई रोक नहीं लग सकी।
डीसी के आदेशों को नहीं मान रहे
जिला उपायुक्त मुकुल कुमार के निर्देशों का किसानों पर कोई असर नहीं हो रहा है। नियमों की अनदेखी कर किसान हर रोज कहीं न कहीं जीरी के फानों को जला रहे हैं। जिसके कारण वातावरण दूषित हो रहा है वायु प्रदूषण के कारण कई प्रकार की बीमारियां जन्म लेती हैं। वायु प्रदूषण के कारण खासकर सांस के मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जबकि इन्हीं बचे अवशेषों को न जलाकर खेतों में ही पानी देकर गलाया जाएं तो यह खाद का काम करती है। जिससे खेतों की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है आगे आगे उगाई जाने वाली फसल की ज्यादा पैदावार होती है। जबकि आग लगाने से मित्र कीट खत्म हो जाते हैं।
पराली जलाने पर हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र द्वारा निगरानी की जा रही है। हरसेक से जो भी सैटेलाइट इमेज मिलती है, उसके हिसाब से फील्ड में जाकर एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। किसानों से अपील है कि वे खेतों में पराली बिलकुल ना जलाएं।-डॉ. सुरेंद्र यादव, कृषि उपनिदेशक
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