संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गत वर्षों की तरह आगामी मानसून सीजन में भी शहर को जलभराव के हालात झेलने पड़ सकते हैं, क्योंकि शहर की सबसे बड़ी स्टॉर्म वाटर ड्रेन का काम चार साल बाद भी अधूरा है। यह मानसून से पहले पूरा होगा या नहीं, इस पर भी संशय है। क्योंकि अभी भी चांदपुर आरओबी समीप ड्रेन डाली जानी है। ये देख निवर्तमान पार्षद नगर निगम अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। उनकी मानें तो आगामी मानसून में भी ड्रेन का काम पूरा होता नहीं दिख रहा, जिससे बारिश के दिनों में शहर को गत वर्षों जैसे जलभराव के हालात झेलने पड़ेंगे।
बता दें कि कन्हैया साहिब चौक से जम्मू कॉलोनी के एसटीपी तक स्टॉर्म ड्रेन का काम अमृत (अटल मिशन फॉर रेजुवेनशन एंड अर्बन ट्रांसपोर्टेशन) स्कीम में नगर निगम करवा रहा है। इसका 24 फरवरी 2019 को शिलान्यास हुआ। ड्रेन से जगाधरी से आ रहे बड़े नाले का पानी यमुनानगर की कॉलोनियों के बजाय आउटर में पुराने एनएच-73 पर डायवर्ट कर एसटीपी तक ले जाना है। इस 4500 मीटर लंबी ड्रेन का काम 15 अगस्त 2019 में पूरा करने का लक्ष्य था, पर अब तक यह पूरा नहीं हुआ। ड्रेन के काम में देरी की वजह काम लगने के बाद दूसरे विभागों से एनओसी लेने से लेकर अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी रही, ऐसा टेंडर व वर्क अलॉट बाद होने पर अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठे। बारिश के खलल में भी कई कई माह लटका। चांदपुर आरओबी समीप ड्रेन डालने तक काम पूरा नहीं हो पाया है।
चार साल से अधूरी ड्रेन के लिए निगम अफसर जिम्मेदार
निवर्तमान पार्षद रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान ने कहा कि करीब 15 करोड़ खर्च के बाद भी चार मानसून सीजन में ड्रेन पानी निकासी में काम नहीं आई, वहीं आगामी मानसून में भी ऐसा होने की आशंका है। आरोप है कि चार साल में भी ड्रेन का काम न होने पाने में नगर निगम अफसर जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने ड्रेन के टेंडर, वर्क अलॉट से पहले काम के बीच की अड़चन दूर नहीं की। अब भी ड्रेन का काम अधूरा होने से मानसून तक ड्रेन का काम नहीं हो पाएगा और शहर को गत वर्षों जैसे जलभराव के हालात झेलने पड़ेंगे।
पूरा प्रयास है कि ड्रेन का काम जल्द पूरा करा लिया जाए। जिससे बारिश के दिनों में ड्रेन जल निकासी के काम आए।- आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।