संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। साढौरा (आरक्षित) सीट पर गत विधानसभा चुनावों में हार का सामना कर चुकी भाजपा इस बार नए चेहरे पर दांव लगा सकती है। यहां से मौजूदा विधायक रेनू बाला को यदि कांग्रेस दोबारा मैदान में उतारती है तो भाजपा उनके सामने जिले की शिक्षा अधिकारी सुमन बहमनी को खड़ा कर सकती है।
दरअसल, विधानसभा चुनावों की घोषणा से काफी पहले ही डीईओ सुमन बहमनी ने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति स्कीम) के लिए अप्लाई कर दिया था। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, सुमन बहमनी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। उनके पति डॉ. सतपाल बहमनी के भाजपा नेताओं के साथ-साथ आरएसएस से अच्छे संबंध हैं।
इससे पहले साढौरा से भाजपा के पूर्व विधायक बलवंत सिंह को वर्ष-2019 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रेनू बाला से हार का सामना करना पड़ा था। तब विधायक रेनू बाला को 65806 वोट और बलवंत सिंह काे 48786 वोट मिले थे। इससे पहले 2014 में हुए चुनाव में इनेलो छोड़ कर भाजपा में आए बलवंत सिंह ने 63772 वोट लेते हुए जीत हासिल की थी, जबकि दूसरे स्थान पर रहीं इनेलो प्रत्याशी पिंकी छप्पर को 49626 वोट मिले थे।
2014 में इनेलो छोड़ भाजपा के प्रत्याशी बने बलवंत सिंह का दाता राम ने काफी विरोध किया था। ऐसा ही कुछ 2019 के चुनाव में भी देखने को मिला। एकबार फिर दाता राम टिकट पर दावेदारी जता रहे हैं। वहीं बलवंत सिंह भी लगातार मीटिंग कर कार्यकर्ताओं से संपर्क साध रहे हैं। यही कारण है कि दोनों की खींचतान में किसी एक को टिकट देकर भाजपा नुकसान नहीं कराना चाहती।
18 साल रहीं राजकीय मॉडल स्कूल की प्रिंसिपल
सुमन बहमनी वर्ष 2003 में प्रिंसिपल पद पर पदोन्नत होकर जगाधरी स्कूल से राजकीय आदर्श संस्कृति सीसे स्कूल बिलासपुर में गई थीं। वह लगातार 18 साल तक स्कूल की प्रिंसिपल रहीं। सुमन बहमनी की क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में अच्छी जान पहचान है।
कमेटी निर्णय करेगी : राजेश सपरा
भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सपरा का कहना है कि साढौरा समेत चारों सीटों पर पार्टी के जो कार्यकर्ता चुनाव लड़ना चाहते हैं उनसे नाम मांगे गए हैं। टिकट किसे दिया जाना है, इसका निर्णय कमेटी करेगी। जिताऊ उम्मीदवार को ही पार्टी की ओर से टिकट दिया जाएगा।