संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जगाधरी वर्कशॉप में चल रही रामलीला के मंच पर भगवान श्रीराम के वनवास से लेकर भरत मिलाप तक के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने दर्शकों को भाई के प्रति प्रेम, माता-पिता के सम्मान और वचन पालन का संदेश दिया गया।
प्रथम दृश्य में भगवान श्रीराम अयोध्या को प्रणाम कर वन की ओर प्रस्थान करते हैं। अयोध्यावासी भी उनके साथ चल पड़ते हैं। श्रीराम उन्हें वापस लौटने के लिए कहते हैं, लेकिन वे उनके साथ रहने का आग्रह करते हैं। रात को जब सभी सो जाते हैं तो श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और सुमंत उन्हें सोता छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। सुबह आंख खुलने पर अयोध्यावासी भावुक होकरलौटते हैं। इसके बाद श्रीराम सुमंत को भी अयोध्या भेज देते हैं और माता-पिता को धैर्य बंधाने का संदेश देते हैं।
अगले दृश्य में राजा दशरथ को अपनी अंतरात्मा के माध्यम से श्रवण कुमार की मृत्यु का प्रसंग याद आता है। शिकार के दौरान शब्दभेदी बाण लगने से श्रवण कुमार की मृत्यु और उसके माता-पिता द्वारा दशरथ को पुत्र वियोग का श्राप देने का दृश्य दिखाया गया। इसके बाद सुमंत के लौटने पर दशरथ श्रीराम के वियोग में प्राण त्याग देते हैं।
भरत और शत्रुघ्न को ननिहाल से अयोध्या बुलाया जाता है। भरत को जब माता कैकेयी द्वारा श्रीराम को वनवास भेजने का पता चलता है तो वह इसका विरोध करते हैं और राजगद्दी स्वीकार करने से मना कर देते हैं। पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद भरत सभी माताओं और अन्य लोगों के साथ श्रीराम को वापस लाने वन पहुंचते हैं।
भरत मिलाप के दृश्य में लक्ष्मण अयोध्या की सेना देखकर संदेह जताते हैं, लेकिन श्रीराम उन्हें भरत पर विश्वास रखने के लिए समझाते हैं। राम की भूमिका वासु, लक्ष्मण की विशाल, सीता की हर्ष, दशरथ की नरेंद्र लाड़ी, सुमंत की प्रवीन रावत और कैकेयी की भूमिका अजय ने निभाई।