लोहे के खंभों में करेंट दौड़ने पर हादसा न हो, इसलिए बिजली मंत्री से लेकर बिजली निगम के उच्चाधिकारियों ने इन खंभों को बदलने के आदेश जारी किए, लेकिन यह आदेश फाइलों की कागजी कार्रवाई में ही सिमट गए हैं।
बिजली निगम पुराने ढर्रे पर अडिग है और अब भी हजारों लोहे के खंभों के सहारे बिजली सप्लाई कर रहा है। लोहे के खंभों में खासकर बरसात के दिनाें में करेंट दौड़ने पर हादसे की आशंका रहती है। यह सब जानकर भी निगम द्वारा लोहे के खंभों को बदलने की जहमत नहीं उठाई जा रही है।
बता दें कि वर्ष-2012 में बिजली मंत्री कैप्टन अजय सिंह ने प्रदेश में सभी जिलों में बिजली निगम अधिकारियों को लोहे के खंभों के स्थान पर सीमेंट के खंभे लगाने के आदेश दिए थे।
इस पर जिले में कुछ समय तक बिजली निगम ने हरकत दिखाई और टीमों का गठन कर लोहे के खंभों को चिह्नित भी किया गया, किंतु बाद में यह आदेश फाइलों की कागजी कार्रवाई में ही सिमटकर रह गए। विभागीय सूत्रों के अनुसार बीते मई माह में बिजली निगम द्वारा आरएबीडीआरपी (रिस्टर्कचर एसलरेटिड पॉवर डेवलपमेंट एंड प्रोग्राम) के तहत एक कंपनी द्वारा सर्वे कराया गया था।
24 जून को रामपुरा में होते-होते टला बड़ा हादसा
बता दें कि बीती 24 जून को रामपुरा कॉलोनी में गली में लगा जर्जर लाहे का खंभों गिरकर आयुष सभ्रवाल के घर में घुस गया था, जिसमें बड़ा हादसा होते-होते टल गया। तब भी कॉलोनी के लोगों ने बिजली निगम पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना था कि बिजली निगम द्वारा लोहे के पुराने और जर्जर खंभों को बदला नहीं जा रहा है, जबकि ये हादसाें का कारण बन रहे हैं। इसी प्रकार शहर के सबसे व्यस्त मार्ग प्यारा चौक से फव्वारा चौक के बीच डीएवी गर्ल्स कॉलेज की तरफ एक कतार में लोहे के दर्जनों खंभे लगे हैं। आसपास सैकड़ों दुकानें होने के कारण इन खंभों के आसपास लोगों की भीड़ रहती है। ऐसे में ये खंभे काफी पुराने और जर्जर होने के कारण हादसे का कारण बन सकते हैं।
डेंजर खंभों को किया जाएगा चिह्नित
बिजली निगम के एसई एचपी शर्मा का कहना है कि काफी लोहे के खंभों को बदला भी गया है। जो खंभे अभी रह गए हैं, उनमें जो काफी पुराने और जर्जर हालात में हैं या वह ऐसे स्थान पर हैं, जहां जल का भराव होता है, ऐसे खंभों को डेंजर घोषित किया जाएगा। साथ ही उनके स्थान पर सीमेंट के खंभे लगा दिए जाएंगे।