संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। शहर के बाजार में रविवार को लगने वाले फड़ी बाजार को लेकर उपजे विवाद का समाधान नहीं हो पाया है। वहीं रविवार को यहां फड़ी व रेहड़ियां लगने को लेकर संशय हैं। व्यापारी इसका विरोध कर रहे, लेकिन फड़ी व रेहड़ी वाले अपनी आजीविका की दुहाई दे रहे हैं। मामला नगर निगम देख रहा है, एक सप्ताह बाद भी इसका समाधान नहीं निकल पाया है।
यहां पर रविवार को करीब 1200 फड़ी व रेहड़ियां लगती हैं। यदि रविवार को यहां से बाजार बंद कर दिया गया तो सैकड़ों घरों के चूल्हे ठंडे हो जाएंगे। यहां पर फड़ी व रेहड़ियां लगाने वालों के पास आजीविका का अन्य कोई साधन नहीं है। रविवार को फड़ी बाजार लगाने का सबसे बड़ा कारण यहां फैक्टरियों में काम करने वाले श्रमिकों की छुट्टी होना है। वहीं रविवार को जगाधरी के बाजार बंद रहते हैं।
ऐसे में यह लोग सड़क किनारे फड़ी व रेहड़ी लगाकर सामान बेचते हैं। छुट्टी होने के चलते श्रमिक बाजार जाते हैं और खरीदारी करते हैं। श्रमिकों को यहां से अपनी जरूरत का सामान किफायती दामों पर मिल जाता है। वहीं दूसरी तरफ फड़ी व रेहड़ी से कई परिवारों का पेट पलता है। नगर निगम के आदेशानुसार दो सप्ताह से यहां फड़ी बाजार नहीं लगा है। वहीं इस रविवार भी यहां बाजार नहीं लगेगा। तीन सप्ताह से बाजार न लगने के कारण लोगों की हालत खराब हो रही है।
उन्हें परिवार का भरण करना मुश्किल हो गया है। फड़ी लगाने वाले आशीष, गुलशन, रिशु, पीयूष, अजय सेठी, दीपक कुमार, विवेक कुमार, हन्नी कुमार, पवन कुमार, राम गोपाल, अभिषेक कुमार, दीपक ने बताया कि उनकी आजीविका का यही सहारा है। उन्होंने कहा कि नगर निगम सैकड़ों परिवार को ध्यान में रखकर यहां बाजार लगवाने की व्यवस्था करे। पीयूष, रिशु ने बताया कि इस फड़ी बाजार से वे अपनी पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। बाजार बंद हो गया तो मजबूरन उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ेगी।
फड़ी बाजार के कारण यहां पर काफी जाम लगता था। कुछ दिन पहले जाम में एक एंबुलेंस फंस गई थी और मरीज की जान पर बन आई थी। इसे ध्यान में रखकर निर्णय लिया गया है। फिलहाल बाजार को लेकर नगर निगम व्यवस्था कर रहा है। लोगों की आजीविका जारी रहे, ऐसी व्यवस्था की जाएगी। - आयुष सिन्हा, नगर निगम आयुक्त