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भूख हड़ताल पर बैठे किसान की बिगड़ी तबीयत, पीजीआई रेफर

Wed, 07 Dec 2016 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
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 मानकपुर औद्योगिक क्षेत्र के लिए अधिग्रहित की गई भूमि की मुआवजा राशि के लिए भूख हड़ताल पर बैठे एक किसान की तबीयत बिगड़ गई। किसान 21 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। किसान की तबीयत बिगड़ने पर अन्य किसानों ने उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया। जहां से उसकी हालत गंभीर देखते हुए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया। हड़ताल के दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
किसान गुरदीप, दर्शनसिंह, अमित, ओंकार, संजीव, निर्मल ने बताया कि भूमि मुआवजे की मांग को लेकर वह  21 दिन से मानकपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित एचएसआईआईडीसी कार्यालय के बाहर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर बैठे हुए हैं। रोजाना दो किसान भूख हड़ताल पर बैठते हैं। हड़ताल के 20वें दिन सोमवार को भूख हड़ताल पर बैठे किसान मानकपुर निवासी धूम सिंह की तबीयत देर रात खराब हो गई। अन्य किसानों ने उसे गंभीर हालत में ट्रामा सेंटर में पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने उसकी हालत गंभीर देख पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। धरने के दिन बीत जाने पर भी किसानों की मांग पूरी नहीं की गई। जिसके चलते किसानों का धरना मंगलवार को भी जारी रहा। किसानों ने इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वे नेशनल हाईवे पर बैठ फिर जाम लगाएंगे।
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ट्रॉमा सेंटर में नहीं मिला फिजिशियन :
किसानों ने बताया कि जब वे धूम सिंह को हॉर्ट में दर्द हुआ, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ी और वे उसे ट्रॉमा सेंटर में लेकर आए, लेकिन यहां फिजिशियन न होने के कारण उन्हें जगाधरी सिविल अस्पताल रेफर किया गया। जहां से उसे पीजीआई रेफर किया गया। किसानों का कहना है कि जिले में एक मात्र ट्रॉमा सेंटर है और यही पर फिजिशियन नहीं है। जिससे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। फिजिशियन न होने पर मरीजों को  पीजीआई रेफर कर दिया जाता है।
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क्या है मामला :
किसानों ने बताया कि गांव मानकपुर, उद्यमगढ़ व गढ़ी बंजारा की 259 एकड़ भूमि का मानकपुर औद्योगिक क्षेत्र फेज दो के लिए अधिग्रहण का नोटिस 2007 में जारी हुआ था। जिसका मुआवजा 2009 में आठ लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिया गया। उसके बाद यह मामला कोर्ट में चला गया। कोर्ट से 2015 में आदेश हुए कि किसानों को तीस लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। 19 महीने बीत जाने के बाद भी कोर्ट के इस आदेश पर अब तक एचएसआईआईडीसी ने कोई मुआवजा राशि किसानों को नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यदि वह मुआवजा देने में सक्षम नहीं है तो दिसंबर 2016 में मानकपुर के ही इसी रकबे में से और जमीन क्यों अधिग्रहण कर रहे हैं। एचएसआईआईडीसी द्वारा अन्य जिलों में तो मुआवजा दे दिया गया है, लेकिन अभी तक हमें क्यों वङ्क्षचत रखा गया है। एचएसआईआईडीसी के पास न तो कोई स्टे आर्डर है और न ही कोई रोक है। परंतु फिर भी एचएसआईआईडीसी  कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहा है। मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने 16 नवंबर से एचएसआईआईडीसी के मुख्य गेट पर धरना दिया। इसके बाद  बाद भूख हड़ताल भी श्ुारू की, लेकिन फिर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। अब किसानों ने फैसला किया है, जब तक उन्हें मुआवजा नहीं दिया जाएगा, तब तक वह अनिश्चित कालीन हड़ताल पर ही बैठे रहेंगे।
 
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