यमुनानगर। जिस प्रकार गंगा में गंदा जल मिलकर पवित्र हो जाता है, उसकी प्रकार संसार का कितना भी बुरा इंसान हो, ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के बाद वह इंसानियत की राह पर आ जाता है। इंसानियत के उत्थान के लिए इंसान को ब्रह्मज्ञान की जरूरत है। ये बात पिंजौर से आए मुखी महात्मा जगदीश सिंह ने कहें। निरंकारी मिशन के अनेक गीतकार महापुरुषों ने भजन, कविताओं और विचारों से संगत का समा बांधा। समागम में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रभु यश का लाभ उठाया।
महात्मा जगदीश ने अपने प्रवचनों में फरमाया कि विश्वभर में इंसानियत का विकास मानव जाति की प्रथम आवश्यकता है। जिस प्रकार बिना प्राण के शरीर, बिना जल के नदी और बिना सुगंध के पुष्प का कोई महत्व नहीं होता। उसी प्रकार इंसानियत रहित मानव का भी कोई महत्व नहीं है। इंसानियत का स्वरूप ही है कि मानव समाज की भलाई को ध्यान में रखकर आज निरंकारी अनुयायी एक दूसरे के साथ प्रेमपूर्वक घुल मिल कर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। परोपकार आज निरंकारी मिशन संसार में बांट रहा है। समागम में खिजराबाद मुखी नितिन गांधी, बुडिय़ा ब्रांच के संचालक महात्मा सोमप्रकाश, महात्मा अश्वनी, बनारसी दास, धर्मपाल, डॉ. सुर्जन, बालकिशन, अनिल, अजमेर सिंह, अमित केसिया, धर्मवीर, जगमाल, फकीर चंद, जसवंत लाल आदि ने भाग लिया।