साढौरा। भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व अत्यंत विराट एवं अलौकिक है। मानव को उनके आदर्शों व शिक्षा पर चलना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र धर्म स्थापना के जिस संदेश को धारण किए हुए है, वह हर काल, युग की सीमाओं से परे है। वह वर्तमान की समस्त समस्याओं का निवारण करता है। ये विचार साध्वी जयंती भारती ने कस्बे के हिन्दू स्कूल में आयोजित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की पांच दिवसीय श्रीकृष्ण कथा के पहले दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।अधिवक्ता वीरेन संधू, नगरपालिका चेयरपर्सन शालिनी शर्मा और भाजपा नेता सुमत जैन ने कथा का शुभारंभ किया।
साध्वी ने समाज की वर्तमान स्थिति पर कहा कि आज हर मनुष्य का अंतःकरण अंधकारमय है। अज्ञानता के तम से आच्छादित है। जब जब मानव के भीतर अज्ञानता व्याप्त होती है, तब-तब मनुष्यता का पतन होता है, मानवीय गुणों का ह्रास होने लगता है। समाज में अधर्म, अत्याचार, अनाचार, भ्रष्टाचार, इत्यादि कुरीतियां सिर उठाने लगती हैं। यही कारण है कि हमारे ऋषि मुनियों ने उस परम तत्व के समक्ष यह प्रार्थना की है कि हे प्रभु, हमारे भीतर के अंधकार को दूर कीजिए, ताकि ज्ञान प्रकाश को पाकर हम अपने जीवन को सुंदर बना सकें।
जब तक मानव अज्ञानता के गहन अंधकार से त्रस्त रहेगा, तब तक उसका सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। अंधेरा हमें भ्रमित भी करता है और भयभीत भी करता है। प्रकाश में सब कुछ स्पष्ट दिखता है। न कोई भ्रम रहता है, न ही भय। जिस प्रकार बाहर के प्रकाश से बाह्य अंधकार दूर होता है उसी प्रकार आंतरिक ज्ञान प्रकाश से आंतरिक अज्ञान तमस नष्ट होता है। ज्ञान प्राप्ति किसी पूर्ण गुरु की शरण में जा कर ही होगी जो मानव के भीतर उस ईश्वरीय प्रकाश को प्रकट कर देते हैं। उन्होंने कहा कि वैदिक काल में भारतीय नारी का स्थान बहुत ऊंचा रहा है। विद्या का आदर्श सरस्वती में, धन का आदर्श लक्ष्मी में, पराक्रम का दुर्गा में, पवित्रता का गंगा में पाया जाता था। उन्होंने कहा कि नारी को अबला समझ कर उससे जीने का अधिकार भी छीना जा रहा है परन्तु नारी अबला नहीं सबला है। आज के परिवेश में कन्या को जन्म देने से पहले ही मार रहे हैं। इस दौरान नंबरदार जसबीर सिंह पांडों, सुभाष धीमान, पार्षद संगीता ठुकराल, अनिल जाटियान, गुलशन ठुकराल, पूर्णचंद, रामपाल व अन्य उपस्थित रहे।
श्रीकृष्ण कथा के दौरान प्रवचन करतीं साध्वी जयंती भारती। संस्थान- फोटो : Samvad