संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। हरियाणा में सिख समाज की प्रमुख धार्मिक संस्था हरियाणा गुरुद्वारा सिख प्रबंधक कमेटी (एचएसजीपीसी) की स्थापना समाज के चौमुखी विकास और धार्मिक मर्यादा की रक्षा के लिए की गई थी। वह अब सत्ता संघर्ष और पद की लालसा में उलझ कर रह गई है। यह बात समाजसेवी सरदार परमजीत चंगनौली ने कही।
उन्होंने कहा कि एचएसजीपीसी का उद्देश्य था कि राज्य के गुरुद्वारों का प्रबंधन स्वतंत्र रूप से हो, सिख धर्म से जुड़े कार्य जैसे धार्मिक शिक्षा, सामाजिक सेवा, लंगर संचालन, गुरबाणी प्रचार और जरूरतमंदों की सहायता सिख पंथ की भावना के अनुरूप किए जाए। शुरुआती वर्षों में संस्था ने कुछ सकारात्मक पहल की, लेकिन बीते वर्षों में आंतरिक संघर्षों और राजनीतिक प्रभाव ने संस्था की कार्यप्रणाली को बाधित कर दिया है।
कमेटी के जूनियर उपप्रधान द्वारा दिया गया सार्वजनिक बयान कि कमेटी के सभी सदस्यों का डोप टेस्ट होना चाहिए। यह एक नासमझी भरा और सिखों की आस्था उनकी भावनाओं को आहत करने वाला बयान है। सिख संगत ने जो सदस्य चुने थे वो गुरुघर की सेवाओं, उनके रखरखाव और प्रबंधन के लिए चुने थे न कि डोप टेस्ट कराने के लिए।
उपप्रधान का ये कहना कि कमेटी के कुछ सदस्य शराब और सूखे नशे का सेवन करते है, यह बयान धार्मिक संस्थाओं की मर्यादा, परंपराओं और कार्यशैली पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर उभरा है। कमेटी में सबसे बड़ा संकट नेतृत्व की होड़ है। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के बीच अधिकारों को लेकर खींचतान लगातार बनी हुई है। एक गुट दूसरे पर एकाधिकारवाद और फैसलों में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरा गुट जवाब में संगठन को अस्थिर करने के प्रयास बता रहा है।