संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। पेरिस ओलंपिक की शुरुआत हो चुकी है। जिले से भी काफी खिलाड़ियों का ओलंपिक तक पहुंचने व पदक जीतने का सपना है, पर सरकारी स्तर पर कोचाें की कमी आड़े आ रही है। जिले में ओलंपिक से जुड़े अधिकांश खेलों के सरकारी स्तर पर कोच नहीं है। यह स्थिति कई वर्षों से बनी हुई है। इस पर खिलाड़ी प्रशिक्षण के लिए दूसरे जिलों या राज्यों में जाने या फिर खेल छोड़ देने पर मजबूर हैं।
खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग की ओर से सरकारी स्तर पर तेजली खेल परिसर में बैडमिंटन, भारोत्तोलन, तलवारबाजी, कुश्ती, हॉकी, कबड्डी, बॉक्सिंग, लॉन टेनिस, टेबल टेनिस के सरकारी कोच हैं। ओलंपिक में करीब 40 खेल स्पर्धाएं शामिल हैं। यानी 31 खेल स्पर्धाओं के सरकारी स्तर पर कोच नहीं हैं।
हालांकि खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग की ओर से जिले के 33 सरकारी व निजी संस्थानों में खेल नर्सरियां भी शुरू की हैं, पर उनमें भी 11 खेल कवर हो रहे हैं। इनमें पांच खेल ऐसे हैं, जिनके सरकारी स्तर पर पहले स कोच हैं। यानी खेल नर्सरियों में छह ही खेलों के प्रशिक्षण की सुविधा हुई हैं, जिनके सरकारी स्तर पर कोच नहीं हैं। इनमें एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, फुटबॉल, नेटबाॅल, स्विमिंग, वॉलीबॉल खेल शामिल हैं।
इसके अलावा आर्चरी, कराटे, क्रिकेट, क्रॉस कंट्री स्कीइंग, गोल्फ, घुड़सवारी, जूडो, ताइक्वांडो, बेसबॉल/सॉफ्टबॉल, रोइंग, साइकिलिंग, हैंडबॉल जैसे खेलों के प्रशिक्षण की सरकार स्तर पर सुविधा नहीं है। इनके प्रशिक्षण के लिए खिलाड़ी जिले की निजी अकादमियों या फिर दूसरे जिलों व राज्यों की दौड़ लगाने पर मजबूर हैं वहीं आर्थिक कमजोर खिलाड़ी चाहकर भी खेलों में नहीं आ पाते।
खेल प्रेमी व खिलाड़ी चिराग, राहुल, लक्ष्मण, सतेंद्र, राजकुमार ने कहा कि जिले में सरकारी स्तर पर सिर्फ नौ ही खेलों के कोच होना चिंता का विषय है। खेलों के मैदान व सामान से लेकर स्टाफ के वेतन भत्तों पर करोड़ों रुपये खर्च होता है, पर कोचों की कमी में यह सब व्यर्थ साबित होगा। खेल मैदान, सामान व स्टाफ पर खर्च का मकसद खेलों के लिए खिलाड़ी तैयार करना है, जो बिना कोच के संभव नहीं है। सरकार को खासकर ओलंपिक व युवाओं के ज्यादा रुझान वाले सभी कोचों की सरकारी स्तर पर सुविधा करनी चाहिए।
कोचों की कमी को जल्द पूरा किया जाना है। इसको लेकर प्रक्रिया चल रही है। - शिल्पा गुप्ता, जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी।