संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों में पांच प्रमुख बीमारियों मोतियाबिंद, बच्चेदानी, दूरबीन से पित्त की थैली का ऑपरेशन, उल्टी-दस्त और सांस संबंधी दमा के रोगों का इलाज नहीं होगा। इस बीमारियों का इलाज और ऑपरेशन केवल सरकारी अस्पतालों में ही होगा। परंतु, जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही संसाधन।
ऐसे में सरकारी अस्पताल में उपचार कराने वाले मरीजों को लंबी वेटिंग का सामना करना पड़ सकता है। वहीं निजली अस्पताल में उपचार कराने गए तो उन्हें अपनी जेब हल्की करनी पड़ेगी, क्योंकि अब इनमें आयुष्मान योजना के तहत नहीं बल्कि कैश भुगतान करना होगा। आयुष्मान योजना के तहत उपचार कराने वालों में 100 में से 60 मरीज इन्हीं बीमारियों के हैं।
आयुष्मान में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाले लोगों की संख्या 70 से 80 प्रतिशत है। इसके बाद पित्त की थैली का व बच्चेदानी का ऑपरेशन कराने वाले लोग हैं। जिला नागरिक अस्पताल में केवल दो ही नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। ओपीडी में सुबह से ही इनके पास मरीजों की लंबी लाइन लग जाती है। ऐसे में दोनों मरीजों की सर्जरी के लिए बड़ी मुश्किल से वक्त निकाल पाते हैं।
जब वह सर्जरी करने जाते हैं तो आंखों की ओपीडी नहीं हो पाती। इसी तरह बच्चेदानी का ऑपरेशन कराने के लिए मजबूरी में निजी अस्पताल में जाना पड़ सकता है। वह इसलिए कि जिले के केवल दो ही महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। उप जिला अस्पताल जगाधरी की डॉक्टर अभी छुट्टी पर हैं। जिला नागरिक अस्पताल की गायनी ने दो दिन पहले ही ज्वाइन किया है। हस्वास्थ्य विभाग को सिजेरियन डिलीवरी कराने के लिए निजी महिला डॉक्टरों को पेमेंट करके बुलाना पड़ रहा है।
वहीं पित्त की पथरी का ऑपरेशन कराने वालों को भी लंबी वेटिंग मिल सकती है, क्योंकि जिले में केवल दो ही सर्जन हैं, जो इस वक्त जगाधरी व यमुनानगर में कार्यरत हैं। गर्मी के दिनों में डायरिया फैलने से उल्टी दस्त व 70 साल से अधिक आयु में दमा के मरीज बढ़ने लगते हैं। ऐसे में इनके इलाज के लिए पूरे जिले में केवल एक ही फिजिशियन हैं। फिजिशियन के पास मरीजों की लाइन लगी रहती है। ऐसे में मरीजों की परेशानी बढ़नी तय है।
पैनल पर 33 निजी व 10 सरकारी अस्पताल
जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत करीब सात लाख नौ हजार पात्र हैं। इनमें से 6.45 लाख से अधिक कार्ड बन चुके हैं। योजना के तहत पात्र पांच लाख रुपये तक का उपचार हर साल करवा सकते हैं। क्योंकि अब अब तीन लाख रुपये सालाना आय वाले लोग भी चिरायु योजना के तहत अपना कार्ड बनवा रहे हैं तो पात्रों की संख्या भी बढ़ी है। आयुष्मान योजना के पैनल में जिले के 33 प्राइवेट व 10 सरकारी अस्पताल हैं।
निजी अस्पतालों को कोई फर्क नहीं पड़ता : डाॅ. गुलाटी
जिले में आयुष्मान भारत योजना के संयोजक डाॅ. जेके गुलाटी का कहना है कि जिन पांच बीमारियों का उपचार प्राइवेट अस्पतालों में बंद किया गया है, उन्हीं के सबसे ज्यादा मरीज आते हैं। इनके बंद होने से प्राइवेट अस्पतालों पर कोई असर नहीं पडे़गा। अब जो भी उनके पास आयुष्मान योजना के तहत उपचार कराने आएगा उसे पहले बता देंगे कि इसके तहत उपचार नहीं होगा। अब उपचार कराने के बदले प्राइवेट में पैसे देने होंगे। करीब 10 से 15 करोड़ रुपये यमुनानगर के प्राइवेट अस्पतालों सरकार की तरफ बकाया है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त व्यवस्था है। आयुष्मान भारत योजना के तहत लोग सरकारी अस्पतालों में उपचार करवा सकते हैं। हमारे पास सर्जन, फिजिशियन व स्त्री रोग विशेषज्ञ सब हैं। किसी को कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। - डॉ. वागीश गुटेन, नोडल ऑफिसर आयुष्मान भारत योजना यमुनानगर।