फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डिलीवरी केस बढ़े पर नहीं बढ़ी गाइनाक्लाजिस्ट, जरूरत पड़ने पर बुलानी पड़ रही प्राइवेट डाक्टर

Sun, 11 Sep 2016 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर।
विज्ञापन
यमुनानगर - फोटो : यमुनानगर
विज्ञापन
 यमुनानगर। जिले के सबसे बड़े सिविल अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के लिए आने वाले महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन उनकी डिलीवरी के लिए डाक्टर पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में प्राइवेट डाक्टरों को बुलाकर डिलीवरी करवाई जा रही है, जिस पर विभाग भारी-भरकम रकम खर्च कर चुका है। बीते छह महीने में अस्पताल में प्रतिमाह औसत 325 डिलीवरी हुई हैं। इसके बावजूद यहां महिला डाक्टरों की संख्या नहीं बढ़ रही है। आमतौर पर यहां एक ही सरकारी गाइनाक्लाजिस्ट रहती है, जिसके जिम्मे ही सारी डिलीवरी होती हैं।
विज्ञापन


सिविल अस्पताल में इस समय दो गाइनाक्लाजिस्ट (महिला रोग विशेषज्ञ) हैं। इसमें एक महिला डाक्टर जगाधरी अस्पताल से डेपूटेशन पर है, जबकि दूसरी डाक्टर ने तीन दिन पहले ही (छह महीने की लीव के बाद) ज्वाइन किया है। सितंबर के महीने के पहले नौ दिन में ही डिलीवरी के 130 केस हो चुके हैं। हर रोज औसतन 13 डिलीवरी हो रही हैं यानि हर दो घंटे में एक डिलीवरी। लगातार बढ़ रहे डिलीवरी केसों से डाक्टरों का काम भी बढ़ रहा है। वहीं, डाक्टर की कमी से मरीज के परिजनों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।

औसतन तीन सिजेरियन डिलीवरी होती है अस्पताल में:
बीते छह महीने में सिविल अस्पताल में 1993 डिलीवरी केस हुए हैं, जिसमें 534 डिलीवरी सिजेरियन हुई हैं। ऐसे में हर रोज औसतन 11 बच्चे जन्म लेते हैं, जिसमें तीन केस सिजेरियन होते हैं। सिजेरियन केस में महिला विशेषज्ञ की उपस्थिति जरूरी होती है। मार्च 2016 में 277, अप्रैल में  287, मई में 313, जून में 406 तथा जुलाई में 416 डिलीवरी केस हुए हैं। जिनमें मार्च में 70, अपै्रल में 92, मई में 87, जून में 70, जुलाई में 104 तथा अगस्त में 111 सिजेरियन केस हुए हैं।
विज्ञापन


ऑन कॉल डाक्टर पर खर्चे 2.65 लाख :  
डाक्टर्स की अनुपस्थिति में सिविल अस्पताल में निजी डाक्टर को ऑन कॉल बुलाने की व्यवस्था है। लेकिन यह व्यवस्था बहुत महंगी पड़ रही है। सिविल अस्पताल में छह महीने में निजी डाक्टर ने 106 सिजेयिरन केस किए हैं। इस पर विभाग की ओर से 2.65 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।

लापरवाही के केस भी आ चुके हैं सामने:
सिविल अस्पताल में प्रसव के दौरान लापरवाही के कई केस भी सामने आ चुके हैं। बीती 17 जुलाई को महावीर कालोनी निवासी अंकित ने अपनी पत्नी को भर्ती करवाया था। डाक्टर नहीं थी, ऐसे में नर्स ने ऑन कॉल डाक्टर को फोन किया। कई बार निजी डाक्टर को फोन किया गया, लेकिन वह नहीं आई। परेशान होकर अंकित अपनी पत्नी को निजी अस्पताल में ले गया। इसी तरह के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। जिसमें डाक्टर की कमी की वजह से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ चुकी है।   

अस्पताल में पांच महिला डाक्टरों की जरूरत : सीएमओ
सिविल अस्पताल की एडशिनल सीएमओ एवं एमएस डॉ. रितू चौधरी का कहना है कि अस्पताल में महिला डाक्टरों की कमी है। इसके बावजूद मरीजों को बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। जरूरत पड़ने पर निजी डाक्टर को ऑन काल बुलाने की व्यवस्था भी की गई है। डिलीवरी केस को देखते हुए अस्पताल में चार से पांच महिला विशेषज्ञ की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें