जिले में सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की तरफ बढ़ते रुझान से यमुनानगर व जगाधरी के मरीजों की संख्या तीन वर्षों के भीतर लगभग दो गुना हो गई है। बढ़ती मरीजों की संख्या के आगे दोनों अस्पतालों में मुहैया सुविधाओं का दायरा कम पड़ने लगा है। दवा वितरण की बात की जाए तो दोनों जगह हर दिन की दो हजार ओपीडी के आंकड़े पर महज आठ दवा काउंटर ही उपलब्ध हैं।
इस कारण दवा लेने के लिए तक मारामारी की स्थिति बनने लगी है। जिसमें काफी देर लाइन में लगने व धक्के खाने के बाद मरीज व तीमारदारों को दवा मिल पाती है। बता दें कि यमुनानगर के सिविल अस्पताल में हर दिन 1200 और जगाधरी के सिविल अस्पताल में 800 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। यमुनानगर अस्पताल के पांच दवा काउंटर हैं। इनमें एक वरिष्ठ नागरिक व दो-दो महिला पुरुष के लिए हैं। जबकि जगाधरी अस्पताल के तीन दवा काउंटर हैं। इनमें एक वरिष्ठ नागरिक व एक-एक महिला पुरुष के लिए है।
यमुनानगर के सिविल अस्पताल में दवा के लिए लाइन में खड़े ब्रिजेश, रमन, अभय, सुषमा, सत्या देवी, संतोष, नरायणवती ने कहा कि पहले पर्ची कटवाने और फिर डॉक्टर से मिलने के लिए वे लाइन में लगे। अब काफी देर से दवा के लिए कतार में लगे हुए हैं। लेकिन भीड़ ज्यादा होने से आधे घंटे बाद भी उनकी बारी नहीं आ पाई। गर्मी के मारे पसीने छूट रहे हैं और वह बेहाल हैं। ज्यादा परेशानी प्यास व लघुशंका लगने पर होती है, क्योंकि इसके लिए लाइन छोड़कर जाने मरीज व तीमारदार को दोबारा लाइन में पीछे खड़ा होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अस्पताल में मरीजों की संख्या को देखते हुए दवा काउंटर बढ़ाए जाने चाहिए, ताकि मरीजों व उनके साथ आए तीमारदारों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
न पर्याप्त शेड न काउंटर, धूप में खड़े होकर करना पड़ता इंतजार
जगाधरी सिविल अस्पताल में मरीजों की संख्या की तुलना में न पर्याप्त दवा काउंटर है और न ही इसके बाहर मरीजों को धूप से बचाने के लिए शेड पूरा है। अस्पताल में रोजाना 800 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। जो दवा लेने के लिए अस्पताल परिसर में बाहर की तरफ बने दवा वितरण केंद्र पर लाइन में लगते हैं। इस केंद्र के आगे लगा शेड इतना छोटा है कि तीनों काउंटर में से किसी के भी आगे जब मरीज व तीमारदार की संख्या 20 से अधिक हो जाती है तो वह शेड के बाहर आ जाता है। इस कारण उसे दवा के लिए धूप में खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। इसी तरह लाइन में खड़े रामकिशन, दिलावर, सुनीता, बीना, राजेश्वरी ने कहा कि वह अस्पताल में भर्ती अपने मरीज के लिए दवा ले रहे हैं। लेकिन शेड छोटा होने पर उन्हें मजबूरन धूप में ही लाइन में लगना पड़ रहा है।
अस्पताल में दवा काउंटर के आगे लगे शेड पर्याप्त हैं। अगर मरीजों को दवा लेने में परेशानी हो रही है तो दवा काउंटर बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
डॉ. विजय दहिया, चिकित्सा अधीक्षक, सिविल अस्पताल, यमुनानगर।
दवा काउंटर के आगे और शेड लगाए जाने का प्रपोजल भेज दिया गया है। दवा काउंटर की संख्या बढ़ाने को लेकर भी विचार किया जा रहा है। जल्द ही अस्पताल प्रशासन की ओर से इस पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, ताकि मरीजों व उनके साथ आने वाली तीमारदारों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
डॉ. पूनम दहिया, चिकित्सा अधीक्षक, सिविल अस्पताल जगधरी।