संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गांव फतेहपुर की ममता ने सीमित संसाधनों और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच न सिर्फ खुद के लिए रोजगार का रास्ता चुना, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया। वर्ष 2019 में शुरू किया गया शहद पैकिंग का छोटा सा कार्य आज जिले में पहचान बना चुका है।
स्वयं सहायता समूह के अंतर्गत भूमि ग्रुप के सहयोग से ममता ने “उड़ान संगठन” की नींव रखी। इस संगठन के माध्यम से शहद पैकिंग का कार्य शुरू हुआ, जिसमें आज पांच ग्रामीण महिलाएं नियमित रूप से काम कर रही हैं। ममता स्वयं इन महिलाओं को प्रशिक्षण देती हैं और मजदूरी के आधार पर काम सिखाती हैं। प्रत्येक महिला को प्रतिदिन लगभग 400 रुपये का मानदेय मिल रहा है, जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वे आत्मसम्मान के साथ जीवन जी रही हैं।
हालांकि अभी यह कार्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से नहीं जुड़ा है, लेकिन जिले के भीतर शहद पैकिंग और आपूर्ति का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय बाजारों में शुद्ध शहद की मांग के चलते ममता का प्रयास ग्रामीण रोजगार का स्थायी मॉडल बनता जा रहा है।
इस सफर में ममता को परिवार का भी भरपूर साथ मिला। पति मुकेश मधुमक्खी पालन से जुड़े हैं, जिससे शहद उत्पादन में मदद मिलती है, जबकि बेटा लविश पैकिंग कार्य में सहयोग करता है। ममता का मानना है कि सरकार की योजनाएं महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं, लेकिन सब्सिडी की मात्रा बढ़े तो और अधिक महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ सकती हैं। फतेहपुर की ममता आज उन महिलाओं की आवाज हैं, जो घर से निकलकर अपने हुनर के दम पर पहचान बनाना चाहती हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का सपना देखती हैं।