संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर अंबाला जगाधरी हाइवे पर गांव भटली (भटौली) में शताब्दियों पुराना शिव मंदिर है। इसका मंदिर का इतिहास 5500 वर्ष पुराना बताया जाता है। इसका अतीत महाभारत काल से भी पुराना होने की कई कथाएं हैं। जिसकी पौराणिक और आध्यात्मिक मान्यताएं हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां पर भगवान शिव प्रकट हुए थे और शिवलिंग के रूप में विराजमान हो गए थे। शिवलिंग का जलाभिषेक कर पूजन करने वाले की मनोकामनाएं पूरी करने का भगवान शिव ने कालांतर में वचन दिया था। ऐसे में इस मंदिर के प्रति लोगों में आस्था अधिक है। महाशिवरात्रि और सावन में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की पांच किलोमीटर लंबी कतार यहां लगती है।
यह मंदिर हाइवे से काफी दूर स्थित है। यहां भीड़ के चलते कई थानों से पुलिस के साथ गांवों से दर्जनों सेवादार लगाए जाते हैं। इन मंदिर की मान्यता जिले, प्रदेश के साथ-साथ विदेशों तक भी है। मान्यता है कि यहां पर भगवान शिव के प्रतीक का जलाभिषेक और पूजन करने से श्रद्धालुओं के कष्ट दूर हो जाते हैं। महाशिवरात्रि के लिए यहां तीन महीने पहले ही तैयारियां होने लगती हैं।
भटली गांव के इस स्वयं-भू शिवलिंग मंदिर को महाभारत काल से भी पहले का बताया जाता है। जिसका उल्लेख पुराणों में भी है। इस मंदिर में महाशिवरात्रि का पर्व अनोखे ढंग से मनाया जाता है। गांव भाटली का यह शिव मंदिर प्रदेश के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। मंदिर के पुजारी जितेंद्र शास्त्री ने बताया कि इसकी विशेषता यह है कि मंदिर में स्वयं-भू शिवलिंग स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार अज्ञातवास में पांडवों ने यहां तपस्या की। जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां पांडवों को दर्शन देने आए थे। तब से यहां पर ज्योति स्वरूप स्वयं-भू शिवलिंग है। मंदिर प्रांगण में सदियों पुराना वटवृक्ष आज भी है और जो इस घटना का साक्षी बताया जाता है। इसके ठीक सामने स्वयं-भू शिवलिंग है।