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बारिश से जिले की 104 सड़कें टूटी, मरम्मत के लिए चाहिए 150 करोड़ रुपये

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टूट कर खस्ता हालत में जगाधरी-वर्कशॉप रोड। - फोटो : Yamuna Nagar
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यमुनानगर। बारिश से पीडब्ल्यूडी की 104 सड़कों को काफी नुकसान हुआ है। इनमें से कुछ सड़कें तो पहले से ही टूटी थी, जो बची हुई थी वह मानसून सीजन में बारिश के पानी की भेंट चढ़ गई।
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बारिश के पानी ने सड़कों को काफी क्षतिग्रस्त किया है। खस्ताहाल सड़कों को नए सिरे से बनाने और इनकी मरम्मत के लिए लोनिवि को 150 करोड़ रुपये चाहिए। लोनिवि ने टूटी सड़कों को बनाने के लिए 150 करोड़ रुपये का एस्टीमेट मुख्यालय भेजा था। परंतु अब इसको मंजूरी नहीं मिली है। इससे साफ है कि लोगों को अभी कई माह तक ऐसे ही टूटी सड़कों पर धक्के खाने पड़ेंगे। जबकि इनमें कई सड़कें तो ऐसी हैं जा चलने लायक भी नहीं बची हैं।
ठेकेदारों के प्लांट 15 सितंबर से चलेंगे
मानसून सीजन के दौरान कोई सड़क न तो नए सिरे से बन पाती है और न ही मरम्मत होती है। हालांकि मौसम साफ हो तो मरम्मत करवा दी जाती है। इसलिए सड़कें बनाने वाले ठेकेदार भी अपने प्लांटों को बंद कर देते हैं। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार ठेकेदारों के प्लांट 15 सितंबर से चलेंगे। इसके बाद ही सड़कों के निर्माण में तेजी आने की उम्मीद है।
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कंक्रीट व तारकोल से बनेगी रादौर सड़क
यमुनानगर-रादौर सड़क को चौड़ा करने का मामला भी अधर में लटक गया है। 20 किलोमीटर लंबी इस सड़क को 33 फीट से चौड़ा कर 55 फीट किया जाना था। जिस पर करीब 43 करोड़ रुपये लागत आनी थी। परंतु यह सड़क अब केंद्र सरकार के भारतमाला प्रोजेक्ट में आ गई है। सरकार इसे भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत चौड़ा करना चाहती है। प्रदेश सरकार फिलहाल इसे चौड़ा करके पैसा बर्बाद करना नहीं चाहती। जबकि भारतमाला प्रोजेक्ट में इस सड़क का काम शुरू होने में कम से कम तीन साल लगेंगे। इसलिए प्रदेश सरकार ने फिलहाल करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये इस पर 30 एमएम की लेयर डालने के लिए मंजूर किए हैं ताकि लोगों को राहत मिल सके। परंतु जिस तरह से इस सड़क पर भारी वाहन चलते हैं उस हिसाब से यह सड़क ज्यादा दिन नहीं चल पाएगी। यमुनानगर में विश्वकर्मा चौक से जोड़ियां नाका तक तथा रादौर में जेएमआईटी कॉलेज से त्रिवेणी चौक तक सड़क कंक्रीट से बनेगी। जोड़ियों नाका से जेएमआईटी तक सड़क पर 30 एमएम की लेयर डलेगी।
मंडी में धान लाने वाले किसानों को होगी दिक्कत
एक अक्टूबर से धान की सरकारी खरीद शुरू हो जाएगी। हालांकि इससे पहले ही अनाज मंडियों में धान की आवक शुरू हो जाती है। परंतु टूटी सड़कों के कारण इस बार किसानों को अनाज मंडियों में धान लाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सीजन के दौरान किसानों को फसल के लिए दिन-रात खेतों में आना जाना करना होता है। भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान संजू गुंदियाना, निदेशक मंदीप रोड़छप्पर व भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रामबीर चौहान का कहना है कि इस वक्त सड़कों की हालत बहुत ज्यादा खराब है। शायद ही कोई ऐसी सड़क हो जो न टूटी हो। प्रशासन को चाहिए धान की कटाई से पहले ही सभी सड़कों की मरम्मत करवा दें। टूटी सड़कों के कारण कई बार फसल से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट भी जाती है। इसलिए सड़कों की मरम्मत कराना बहुत जरूरी है। जल्द ही इस बारे में डीसी से मिलेंगे।
150 करोड़ का एस्टीमेट बनाकर भेजा है : नवीन खत्री
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन नवीन खत्री का कहना है कि 104 सड़कों की मरम्मत के लिए करीब 150 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर भेजा हुआ है। 15 सितंबर से ठेकेदारों के प्लांट चल जाएंगे। जैसे ही बजट मंजूर होता है सड़कों की मरम्मत का काम शुरू कर देंगे।
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