हीमोफीलिया के कहर से मरीजों को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम अधूरे नजर आ रहे हैं। क्योंकि जिले में फिलहाल सरकारी स्तर पर इस बीमारी की दवा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में रोग की रोकथाम के लिए मरीजों को दवा के लिए दूसरे जिलों या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है।
जबकि प्रदेश में रोहतक के बाद केवल यमुनानगर के सिविल अस्पताल में ही हीमोफीलिया के लिए स्पेशल वार्ड बना है। इसमें जिले के अलावा साथ लगते जिलों से भी मरीज इलाज के लिए आते हैं, जिन्हें दवा के अभाव में दूसरे जिलों व निजी अस्पतालों की दौड़ के साथ महंगे दामों में दवा खरीदनी पड़ सकती है।
बता दें कि प्रदेश में हीमोफीलिया के करीब 450 मरीज हैं, इनमें से अकेले यमुनानगर में 35 मरीज शामिल हैं। मरीजों की संख्या को मद्देनजर रख स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदेश में रोहतक के बाद केवल जिले में हीमोफीलिया का स्पेशल वार्ड बनाया गया था।
इनमें 35 स्थानीय सहित साथ लगते अन्य जिलों के 24 मरीज इलाज करवा रहे हैं। इतने अधिक मरीज होने के बावजूद विभाग ने उनके इलाज के लिए दी जाने वाली दवा भेजना बंद कर दिया है। इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री ने आदेश जारी किए हुए हैं कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक मरीज को बाहर से दवा लेने को नहीं कहेगा। ऐसे में मरीजों के आने पर चिकित्सकों के पास दवा का स्टॉक खत्म होने के कोरे जवाब के अलावा कुछ नहीं है।
माह में दो इंजेक्शन जरूरी, 16 हजार रुपये का एक
चिकित्सकों की मानें तो हीमोफीलिया के मरीज को प्रत्येक माह दो इंजेक्शन लगाए जाते हैं, इसके अभाव में रोग जानलेवा साबित हो सकता है। सरकारी अस्पताल में मरीजों को इलाज के साथ इंजेक्शन की सुविधा निशुल्क मुहैया कराई जाती है, जबकि बाहर निजी अस्पतालों में एक इंजेक्शन के लिए करीब 16 हजार रुपये खर्च आता है। ऐसे में सरकारी स्तर पर दवा के उपलब्ध न होने पर मरीजों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हीमोफीलिया में कट लगने पर नहीं रुक पाता रक्त
आईएमए के जिला प्रधान डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि हीमोफीलिया बीमारी पैदायशी होती है और ज्यादातर पुरुष में होती है। प्रदेश में इसके करीब 450 मरीज हैं, जबकि जिले में भी करीब तीन दर्जन मरीज इसकी चपेट में बताए जाते हैं। इस रोग में रक्त जमता नहीं है। ऐसे में त्वचा पर हल्का-सा कट लग जाने पर रक्त रुकता नहीं और बहता चला जाता है। इसकी रोकथाम के लिए माह में दो बार इंजेक्शन जरूरी हैं, अन्यथा यह रोग जानलेवा साबित हो सकता है।
हीमोफीलिया की दवा खत्म हो गई है। इस संबंध में डिमांड भेजी जा चुकी है। उम्मीद है कि विभाग की ओर से जल्द अस्पताल में दवाएं उपलब्ध करवा दी जाएगी।
डॉ. विजय दहिया, चिकित्सा अधीक्षक, सिविल अस्पताल, यमुनानगर।