संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। होली पर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए डॉक्टरों की ड्यूटी तय कर दी गई है। सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र सिंह ने जिला नागरिक अस्पताल, उप जिला अस्पताल जगाधरी और जिले के सभी सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को आवश्यक दवाइयों और प्राथमिक उपचार सामग्री का पर्याप्त इंतजाम रखने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार होली के दौरान रंगों के कारण त्वचा एलर्जी, आंखों में जलन, सांस संबंधी दिक्कतें और फिसलकर चोट लगने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इमरजेंसी सेवाओं को सक्रिय रखा जाएगा। अस्पतालों में एंटी-एलर्जिक दवाएं, आंखों की ड्रॉप, बर्न क्रीम और अन्य जरूरी दवाओं का स्टॉक रखने को कहा गया है।
आयुष विभाग के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार ने बताया कि बाजार में बिकने वाले कई रंगों में केमिकल और भारी धातुओं की मिलावट होती है, जो त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे रंगों से खुजली, रैशेज, सूजन और कभी-कभी गंभीर एलर्जी भी हो सकती है। उन्होंने सलाह दी कि होली खेलने से पहले त्वचा पर सरसों या नारियल का तेल लगा लें, ताकि रंग सीधे त्वचा के संपर्क में न आए।
आंखों और मुंह में रंग जाने से बचें तथा छोटे बच्चों पर विशेष ध्यान रखें। अच्छे रंगों की पहचान करना भी जरूरी है। हर्बल या प्राकृतिक रंग आमतौर पर हल्की खुशबू वाले और मुलायम होते हैं, जबकि केमिकल रंग तेज गंध वाले और खुरदरे महसूस होते हैं। यदि रंग पानी में घोलने पर अत्यधिक झाग बनाता है या त्वचा पर जलन पैदा करता है तो उसका उपयोग नहीं करना चाहिए।