- प्लांट स्थापित होने पर बचेगी 9.5 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा, सालाना 45000 एमटी ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से होगा निस्तारण
- 3600 एमटी गोबर का भी होगा निस्तारण, 9500 एमटी जैविक खाद का उत्पादन भी होगा, मई 2027 तक इस परियोजना के पूर्ण होने की उम्मीद है
सुरेश सैनी
यमुनानगर।
करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से जिले के गांव मुकारबपुर में 10 एकड़ भूमि में हरियाणा का पहला गोबरधन योजना संयंत्र कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट लगाया जाना है। प्लांट के लगने से 9.5 करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।
इस प्लांट से सालाना 45000 एमटी ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होगा। इसके साथ ही 36000 मीट्रिक टन गाय के गोबर का भी सही उपयोग होगा। प्लांट से रोजाना 9500 एमटी जैविक खाद का उत्पादन भी होगा और कचरा खुले में फेंकने और लैंडफिल क्षेत्र में आग लगने की स्थिति में होने वाले मीथेन उत्सर्जन व वायु प्रदूषण में भी कमी आएगी। नगरनिगम का यह प्लांट मई 2027 तक इस परियोजना के पूर्ण होने की उम्मीद है। (संवाद)
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सीएनजी के स्थान पर सीबीजी का होगा उपयोग
परियोजना के अनुसार, प्रतिवर्ष 7800 मीट्रिक टन सीओ-2(कार्बन डाई ऑक्साइड) उत्सर्जन में कमी और 2600 मीट्रिक टन सीएनजी के स्थान पर सीबीजी का उपयोग होगा। प्लांट के लगने से युवाओं को रोजगार मिलेगा। वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में गोबरधन योजना के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन के लिए 75 बायो-मीथेनेशन प्लांट्स सहित कुल 500 वेस्ट टू वेल्थ प्लांट्स की स्थापना की घोषणा की गई थी। इसी श्रेणी में यमुनानगर में यह प्लांट का निर्माण होना है।
100 टन गोबर व 125 टन कचरे का होगा प्रबंधन
मुकारबपुर गांव में बनने वाले बायोगैस प्लांट का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को कैल गांव में आयोजित रैली में शिलान्यास कर चुके हैं। इस प्लांट से 100 टन गोबर व 125 टन कचरे का हर दिन प्रबंधन हो सकेगा। वर्तमान में निगम एजेंसियों के माध्यम से डोर टू डोर कचरा उठान व प्रबंधन कर रहा है। इस कार्य पर हर साल करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस गोवर्धन योजना का उद्देश्य गांवों को स्वच्छ बनाना और पशुओं के गोबर और खेतों के ठोस अपशिष्ट पदार्थों को कंपोस्ट व बायोगैस में परिवर्तित कर उससे धन और ऊर्जा का उत्पादन करना है। इस योजना से एक ओर जहां सफाई सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी ओर किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी।
सीबीजी के बारे में यह जाने
सीएनजी के स्थान पर सीबीजी(कंप्रेस्ड बायो गैस) का इस्तेमाल करने का मुख्य कारण यह है कि सीबीजी का कैलोरी मान और गुण सीएनजी के समान होते हैं। इस कारण सीएनजी से चलने वाले वाहनों में बिना किसी संशोधन के सीधे सीबीजी भरा जा सकता है। सीबीजी बायोगैस का एक उन्नत रूप है, जो बायोमास, कृषि अपशिष्ट और अन्य जैविक पदार्थों से बनाया जाता है।
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वर्जन
मुकारबपुर गांव में यह प्लांट लगाया जाना है, जगह चयनित हो चुकी है। प्लांट के लगने से गोबर व कचरे का प्रबंधन हो सकेगा। इसके साथ ही 9.5 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।
-आयुष सिन्हा, निगमायुक्त, यमुनानगर।