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हरियाणा बोर्ड को स्कूलों ने दी परीक्षा शुल्क की झूठी जानकारी

Tue, 07 Jan 2014 09:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/यमुनानगर
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छात्रों से लिए जाने वाले परीक्षा शुल्क की सही जानकारी न देने वाले स्कूलों के प्रति हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने सख्त रवैया अख्तियार किया है। बोर्ड ने एक पत्र जारी कर सभी स्कूलों को 10 जनवरी तक सही जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
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पत्र में कहा गया है कि सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी की 2013-14 परीक्षा के लिए ऑनलाइन भेजे गए पत्रों में परीक्षा शुल्क छूट के लिए भेजी गई अनुसूचित और पिछड़े वर्ग के बच्चों की संख्या जांच में ठीक नहीं पाई गई है।

स्कूल मुखिया 10 जनवरी तक बोर्ड की वेबसाइट पर डाले गए प्रोफार्मे को भरकर और संस्था के मुखिया से सत्यापित करवाकर जिले में बने समन्वय केंद्र में जमा कराएं। ऐसा न करने वाले स्कूल मुखिया के खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा।
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सूत्रों के मुताबिक जिले के कई स्कूलों की ओर से दी गई जानकारी गलत मिली है। स्कूलों को गलती सुधारने के लिए यह मौका दिया गया है।

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के प्रवक्ता ने बताया कि परीक्षा शुल्क के पात्रों की संख्या स्कूलों की ओर से सही नहीं दी गई है। दोबारा से उन्हें जानकारी देने के लिए पत्र लिखा गया है। इसमें 10 जनवरी तक जिले में बने समन्वय केंद्रों में जानकारी उपलब्ध करवानी है।

दोबारा से होगी रिकॉर्ड की जांच
बोर्ड की ओर से लिखे पत्र में कहा गया है कि परीक्षा शुल्क से संबंधित जो रिकॉर्ड स्कूलों की ओर से भेजा गया है, उसमें छात्रों की संख्या ठीक नहीं भेजी गई है। यह गलतियां सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों दोनों के रिकॉर्ड में सामने आई हैं।

कुछ छात्र छूट के पात्र नहीं थे और उनका परीक्षा संबंधी शुल्क विद्यालयों द्वारा बैंकों में चालान के माध्यम से जमा नहीं कराया गया है। जिन स्कूलाें की ओर से जानकारी सही नहीं भेजी गई है, उनकी ओर से जमा करवाए जाने वाले रिकॉर्ड की दोबारा से जांच की जाएगी। अगर इस जांच में कोई भी स्कूल गलत पाया जाता है तो स्कूल संचालक या जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

क्या होता है परीक्षा शुल्क
मार्च में होने वाले 10वीं और 12वीं के बोर्ड एग्जाम के लिए परीक्षा शुल्क लिया जाता है। इसमें अनुसूचित और पिछड़े वर्ग के छात्राओं को छूट दी जाती है, लेकिन इस बार बोर्ड की जांच में सामने आया है कि कुछ स्कूलों की ओर से प्रोफार्मा में सही जानकारी नहीं दी गई है।
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इससे गड़बड़ी की आशंका है। इस आशंका को दूर करने के लिए बोर्ड अधिकारियों की ओर से दोबारा से जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।


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