संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में मंगलवार को धान की सरकारी खरीद शुरू होते ही मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल ने किसानों और आढ़तियों को खूब छकाया। सुबह पोर्टल नहीं चलने के कारण ऑफलाइन गेट पास काटने पड़े। दोपहर में पोर्टल चला भी तो बेहद धीमी गति से। फसल का सत्यापन कराने के लिए कई किसानों को 10 बार तक उंगली स्कैन करवानी पड़ी।
जिले की 13 अनाज मंडियों में पहले दिन केवल रादौर मंडी में करीब 500 क्विंटल धान की खरीद हो सकी। बाकी मंडियों में पोर्टल संबंधी दिक्कतों के चलते धान की सरकारी खरीद नहीं हो पाई। धान लेकर मंडियों में पहुंचे किसान घंटों तक अपनी बारी और पोर्टल के सुचारू होने का इंतजार करते रहे।
किसानों के अनुसार अभी भी बड़ी संख्या में उनका डाटा पोर्टल पर सत्यापित नहीं हुआ है। वहीं कई किसानों की जमीन के हिसाब से धान की निर्धारित मात्रा से कम फसल पोर्टल पर दिखाई दे रही है। इससे गेट पास कटवाने और फसल बेचने में दिक्कत आ रही है। मंडियों के गेट पर पोर्टल नहीं चलने से परेशान किसान सरकार की व्यवस्था पर तंज कसते नजर आए।
जगाधरी मंडी के गेट पर किसानों की लाइन लग गई। क्योंकि किसानों के फिंगर प्रिंट स्कैन ही नहीं हो रहे थे। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना का कहना है कि खरीद शुरू होने से पहले पोर्टल पर सभी किसानों का डाटा दुरुस्त और सत्यापित किया जाना चाहिए था, ताकि मंडियों में पहुंचने के बाद उन्हें इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बारिश के बाद धान सुखाने में जुटे मजदूर
पिछले तीन दिनों से हुई बारिश के बाद मंगलवार को मौसम खुला और धूप निकली। इसके बाद अनाज मंडियों में सुबह से ही मजदूर धान को सुखाने में जुट गए। बारिश के कारण नमी बढ़ने से धान को सुखाना जरूरी हो गया था। मंडियों में मजदूर फसल को पलट-पलटकर सुखाते नजर आए। मंडी से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि मंगलवार से पोर्टल सुचारू रूप से चलने लगेगा और धान के डाटा का सत्यापन तेजी से हो सकेगा। इससे किसानों को फसल बेचने में आ रही परेशानी कम होने की संभावना है।
पोर्टल देखकर हुई हैरानी
गांव सुढैल निवासी किसान राम निवास ने बताया कि उसने छह एकड़ में धान की फसल का पंजीकरण मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर कराया था। वह 10 क्विंटल धान लेकर जगाधरी अनाज मंडी पहुंचा। गेट पास कटवाते समय उसे पता चला कि पोर्टल पर उसके नाम केवल 52 क्विंटल 49 किलोग्राम धान दर्ज है। छह एकड़ में करीब 162 क्विंटल धान होना चाहिए।
धान नहीं हुआ सत्यापित
गांव झींवरेहड़ी निवासी किसान रविंद्र सिंह ने बताया कि खेती की जमीन उसके बेटे के नाम है। वह धान लेकर जगाधरी मंडी पहुंचा था लेकिन वहां पता चला कि उसके नाम दर्ज फसल का डाटा अभी तक सत्यापित नहीं हुआ है। उसके पास करीब 10 एकड़ में धान की फसल है। डाटा सत्यापन नहीं होने के कारण वह फसल बेच नहीं पा रहा है।
अनाज मंडियों में धान खरीद के सभी प्रबंध कर लिए गए हैं। मंगलवार को पहला दिन था, इसलिए थोड़ी दिक्कत रही। बाद में पोर्टल सुचारू हो गया था। - नितिश सिंगल, डीएफएससी, यमुनानगर।
व्यासुपर की अनाज मंडी में धान को सुखाते मजदूर। संवाद- फोटो : Samvad
व्यासुपर की अनाज मंडी में धान को सुखाते मजदूर। संवाद- फोटो : Samvad
व्यासुपर की अनाज मंडी में धान को सुखाते मजदूर। संवाद- फोटो : Samvad
व्यासुपर की अनाज मंडी में धान को सुखाते मजदूर। संवाद- फोटो : Samvad