यमुनानगर। देश के 434 शहरों की लिस्ट में यमुनानगर के स्वच्छता के मामले में 346वें स्थान पर आने की एक वजह ट्विनसिटी में डोर-टू-डोर योजना फेल होना भी है। वर्ष-2016 में नगर निगम ने डिगमैन कंपनी को ठेका देकर यमुनानगर-जगाधरी (शहरी क्षेत्र) में घर-घर से कूड़ा उठाने की कवायद शुरू की, लेकिन निगम द्वारा योजना को आधी-अधूरी तैयारी के लागू कर देने से बात नहीं बन पाई। इसी के चलते वर्षभर योजना के साथ विवादों का चोली-दामन जैसा साथ रहा। इस बीच शहरवासियों को सफाई समस्याओं को लेकर दिक्कतों से दो-चार होना पड़ा उधर, स्वच्छता के मामले में शहर पिछड़ता नजर आया।
घर-घर जाकर कचरा उठाने की परियोजना शुरू से ही विवादों में रही। बीते वर्ष मई में नगर निगम की ओर से योजना को शुरू की गई, मगर योजना शुरू होने के साथ विवाद भी शुरू हो गए। सबसे पहले डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली डिगमैन कंपनी कंपनी मिट्टी उठान करने को लेकर विवादों में आई। निगम के कार्यकारी अधिकारी ने रत के अंधेरे में कार्रवाई कर कर्मियों को मिट्टी भरते पकड़ा। इसके बाद तीन-चार माह से वेतन न मिलने पर कंपनी द्वारा रखे गए सफाई कर्मी तीन बार हड़ताल पर रहे। इस दौरान कर्मियों ने कई बार शहर में रोष मार्च निकालने के साथ नगर निगम, विधायक कार्यालय और लघु सचिवालय में प्रदर्शन किए। इसके साथ नगर निगम के कई पार्षदों ने कंपनी को बिना यूज चार्ज जमा कराने पेमेंट करने पर सवाल खड़े किए। ऐसे में बीते फरवरी माह में नगर निगम को डिगमैन कंपनी को दिए ठेके को रद्द करना पड़ा।
कमियों से सबक लेकर चार जोन में बांट दिए ठेके
नगर निगम की ओर से बीते वर्ष शुरू की गई डोर डू डोर योजना को यमुनानगर-जगाधरी के पूरे शहरी क्षेत्र में एक साथ लागू कर दिया गया। इसका कुछेक क्षेत्र में ट्रायल कर नहीं देखा गया, जबकि कई वार्ड पार्षदों की ओर से इसे पहले कुछ इलाके में लागू करने की मांग रखी गई। क्षेत्रफल अधिक और सफाई कर्मचारियों समेत संसाधनों की कमी में योजना शुरुआत से लड़खड़ाती नजर आई। इसके अलावा विवादों के बीच रहने कारण डिगमैन कंपनी का ठेका रद कर नगर निगम ने बीते अप्रैल माह में चार जोन में बांटकर इसके लिए अलग-अलग ठेके दिए। इसके अलावा नियमों में सख्त किए गए। इससे साबित होता है कि बीते वर्ष निगम प्रशासन की ओर से आधी-अधूरी तैयारी में योजना को लागू कर दिया। इन्हीं कमियों से सबक लेते हुए इस बार योजना को सही ढंग से क्रियान्वयन करने पर जोर दिया गया।
सहीं ढंग से नहीं किया जा सका लागू
वार्ड नंबर-19 से पार्षद नीरज राणा ने कहा कि डोर-टू-डोर योजना की लगभग सभी पार्षदों समेत शहरवासियों ने भी सराहना की थी, किंतु बीते वर्षभर निगम प्रशासन की ओर से इसका सहीं लागू नहीं जा सका। क्षेत्रफल अधिक और सफाई कर्मी व संसाधनों की कमी में योजना पूरी तरह सिरे नहीं चढ़ पाई।
बढ़ाना था दायरा
वार्ड नंबर-18 कर्मबीर ने कहा कि योजना का पहले कुछ इलाके में ट्रायल करना चाहिए था। यहां सफल होने पर धीरे-धीरे उपलब्ध सफाई कर्मियों और संसाधनों को देखते हुए इसका दायरा बढ़ाया जाना चाहिए था, लेकिन पूरे शहर में एक साथ योजना को लागू करने से इसके परिणाम अच्छे नहीं मिल पाए।