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Yamuna Nagar News: गुरुओं की शिक्षा बनी प्रेरणा, सफलता की सीढ़ी चढ़ मुकाम तक पहुंचे

Sun, 21 Jul 2024 03:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। गुरु को भगवान से ऊंचा दर्जा दिया गया है क्योंकि वह केवल हमें इस संसार में जीने के तरीके और अंधकार से प्रकाश तक ले जाना का रास्ता दिखाते हैं। बल्कि ईश्वर से मिलने का मार्ग भी गुरु ही दिखाते हैं। ऐसी मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरुओं की पूजा और उनकी शिक्षा के प्रति आभार व्यक्त करने से जीवन के सभी कष्ट समाप्त होते हैं। इसके साथ ही जीवन का अंधकार दूर होता है। गुरु पूर्णिमा के दिन महर्षि वेद व्यास की पूजा भी की जाती है। जिले के कई अफसर ऐसे हैं, जो आज भी अपनी सफलता के पीछे अपने गुरुओं का बड़ा सहयोग मानते हैं।
गुरु के योगदान से ही बन पाया हूं आईपीएस
मेरे जीवन को संवारने में मेरे गुरुओं का काफी योगदान रहा है। आज उन्हीं की शिक्षा की बदौलत मैं एक आईपीएस अधिकारी हूं। गुरु पूर्णिमा के दिन शिष्य को अपने गुरुदेव के दर्शन अवश्य करना चाहिए। गुरु के सानिध्य से शिष्य का आत्मिक उत्थान होता है। इस पावन पर्व पर साधक शिष्य को अपने गुरुदेव को अहंकार की भेंट देनी चाहिए, क्योंकि गुरुदेव ही शिष्य के सच्चे हितैषी होते हैं, शिष्य का परम कल्याण करते हैं। - गंगाराम पूनिया, एसपी, यमुनानगर।
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अविस्मरणीय है गुरुओं का सहयोग
गुरु का स्थान सबसे ऊंचा होता है। उनकी सफलता व इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे उनके जीवन में दो गुरुओं का सबसे बड़ा योगदान रहा। पहले उनके पिता टेकचंद जो जेल अधीक्षक थे। उन्होंने नैतिकता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने सामाजिक शिक्षा भी प्रदान की। इसके बाद 11 वीं कक्षा में उनके अध्यापक सोमदत्त ने उन्हें तराशा। अध्यापक सोमदत्त ने उनके गुणों को देखकर शिक्षा क्षेत्र में जाने के लिए प्रेरित किया। जिसके बाद उन्होंने इसी क्षेत्र में अपना कार्य किए और यह मुकाम पाया। गुरुओं का सहयोग अविस्मरणीय है। - सुमन बहमनी, जिला शिक्षा अधिकारी यमुनानगर।
जीवन में गुरुजनों का बड़ा महत्व

माता- पिता समाज में व्यवहार को सिखाते हैं और गुरु हमें शिक्षित बनाते हैं, इसीलिए हमारे जीवन में उनका बहुत बड़ा महत्व है। गुरु ही हमें सफलता के रास्ते पर चलना सीखाते हैं और अगर गुरु हमें अच्छे से नहीं सीखाते तो मैं इस मुकाम पर न होती। हमारे जीवन में सब कुछ योगदान गुरुओं का ही रहता है। इनका कर्ज हम कभी नहीं चुका सकते। गुरुमंत्री ही सफलता की कुंजी और पूंजी है। - ओंकार स्वामी, जिला अधिकारी नेहरू युवा केंद्र, यमुनानगर।
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गुरु के योगदान को भुला नहीं सकता
गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु और शिष्य के लिए विशेष होता है क्योंकि यह दिन गुरुओं के प्रति सम्मान और श्रद्धा प्रकट करने का अवसर है। गुरु पूर्णिमा को हिंदू, बौद्ध, और जैन धर्म में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन को महर्षि वेद व्यास के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन और महाभारत की रचना की थी। और जिस पद पर मैं हूं वह मेरे शिक्षक मोहन लाल शर्मा की देन है। मेरी कामयाबी के पीछे मेरे गुरु का बहुत बड़ा योगदान है और इसे भुलाया नहीं जा सकता। - गुलशन शर्मा, नायब तहसीलदार, जिला निर्वाचन कार्यालय यमुनानगर।
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