जगाधरी। जिले के राजकीय विद्यालयों पांच महीने से मिड-डे-मील के लिए विभाग की ओर से राशि ही नहीं भेजी गई है। शिक्षक अपनी जेब और दुकानदारों से उधार लेकर रसोई चलाने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि पांच महीने से भुगतान न होने से अब दुकानदार भी उधार सामान देने से मना करने लगे।
मिड-डे-मील योजना संकट में पड़ने के बाद शिक्षक व अध्यापक संगठन व्यवस्था के विरोध में आ गए हैं। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कांबोज ने बताया कि मई के बाद से मिड-डे-मील की राशि विद्यालयों को नहीं मिली है, इससे स्कूल मुखियाओं और अध्यापकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संघ के राज्य संगठन सचिव कुलवंत सिंह ने कहा कि बच्चों को प्रतिदिन मिड-डे-मील उपलब्ध करवाना विद्यालय की जिम्मेदारी है, परंतु राशि समय पर जारी नहीं होने से अध्यापकों को कई बार उधार लेकर अथवा अपनी ओर से व्यवस्था करनी पड़ती है। इससे अध्यापकों पर अनावश्यक आर्थिक एवं मानसिक दबाव पड़ रहा है। जिला महासचिव रामस्वरूप ने कहा कि शिक्षकों को शिक्षण कार्य पर ध्यान देना चाहिए, न कि योजना की राशि की व्यवस्था के लिए परेशान होना पड़े।
सरकार व विभाग को इस गंभीर समस्या का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। संघ ने मांग की है कि लंबित राशि तत्काल विद्यालयों के खातों में जारी की जाए तथा भविष्य में मिड-डे-मील की राशि हर माह समय पर देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। संघ ने कहा कि बच्चों के पोषण से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना में किसी भी प्रकार की वित्तीय देरी उचित नहीं है। संवाद
देहात के स्कूलों में हो रही ज्यादा परेशानी
संघ के राज्य संगठन सचिव कुलवंत सिंह ने बताया कि राशि को लेकर हर दिन स्कूल मुखियाओं की कॉल आ रही हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत अधिक संख्या वाले और देहात के स्कूलों में हैं। उन्होंने बताया कि रायपुर के विद्यालय में 450 से ज्यादा से विद्यार्थी हैं। इसी तरह शादीपुर के विद्यालय में भी संख्या 450 से ज्यादा है। यहां पर सब्जियां, दूध, लस्सी सहित अन्य सभी कच्ची सामग्री काफी ज्यादा आती है। जगाधरी के बूड़िया गेट स्थित प्राथमिक पाठशाला में 400 से ज्यादा बच्चों का खाना बनता है। स्कूलों के पास केवल चावल, दाल, बेसन और मसाले हैं। इसके अलावा अन्य सामान बाजार से खरीदना पड़ता है। देहात के विद्यालयों में बच्चों की संख्या तो कम हैं, लेकिन दुकानदार बहुत छोटे स्तर के हैं। उनके पास इतने लंबे समय के लिए उधार देनी की क्षमता नहीं है। इससे सभी परेशान हैं।