संवाद न्यूज एजेसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। साध्वी सुयशा भारती ने संपूर्ण मानव समाज को प्रकृति के संरक्षण हेतु जागरूक करते हुए कहा कि परमात्मा ने मनुष्य को संपूर्ण सृष्टि का सिरमौर बनाया है। चौरासी लाख जन्म योनियों में से मानव जन्म को ही कर्म योनि कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य कर्म करने के लिए स्वतंत्र है और उसके ऊपर संपूर्ण प्रकृति की जिम्मेदारी है। लेकिन परमात्मा की जिस रचना को प्रकृति के संरक्षण हेतु बनाया गया था आज वो ही प्रकृति के विध्वंस का कारण बन चुकी है। मानव जाति ने आज अपनी जरूरतों के लिए जो प्रकृति का दोहन किया है उसके कारण प्रकृति के पंच तत्वों में विकृति आ रही है।
सुयशा भारती ने कहा कि वायु में घुलता हुआ प्रदूषण रूपी ज़हर, नदियों का दूषित होता हुआ जल और पृथ्वी का निरंतर बढ़ता हुआ तापमान इस बात का प्रमाण है कि हम अपनी जिम्मेदारी को निष्ठापूर्वक निभा नहीं पाए। हमारा अंतः करण ही बाहर आने वाले बदलाव का मूल कारण है क्योंकि मनुष्य की विचारधारा ही उसकी कर्म गति को प्रवाहित करती है।
सुयशा भारती ने कहा कि ब्रह्मज्ञान की ध्यान साधना द्वारा ही मानव का अंतःकरण परिवर्तित किया जा सकता है क्योंकि ब्रह्मज्ञान की ध्यान साधना ही मन के विकारों को समाप्त करके मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करती है तभी हम स्वार्थ रहित होकर परोपकार एवं कल्याण की भावना से प्रेरित होकर जो भी कार्य करते हैं वह सार्थक होता है।
ब्रह्म ज्ञान रूपी संपदा पर संपूर्ण मानव जाति का अधिकार है और यह मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकता है क्योंकि जैसे बिना विद्या प्राप्त किए एक बालक विद्वान नहीं बन सकता इसी प्रकार ब्रह्म ज्ञान के बिना एक मानव कदापि दैवीय गुणों को धारण नहीं कर सकता।