यमुनानगर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से शिव मंदिर पाबनी कलां में चार दिवसीय शिव कथा का आयोजन किया गया। पहले दिन साध्वी गौरी भारती ने सती प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि लगन से मानव प्रभु को पा सकता है।
उन्होंने कहा कि सती जी की लगन बचपन से भगवान शिव के साथ लगी थी। इसी लगन के परिणाम स्वरूप उन्हें अपने जीवन में शिव की प्राप्ति हुई। यदि मानव के मन में भी प्रभु की लगन लग जाए तो उसे भी जीवन में प्रभु की प्राप्ति हो सकती है। यह प्रभु का स्वभाव है कि कोई भी व्यक्ति चाहे वह कैसा भी क्यों न हो उसे आश्रय देते हैं। भगवान श्री कृष्ण भी अर्जुन से कहते है की कोई पापी से भी पापी क्यों न हो पर इस ज्ञान रूपी नौका से भव सागर पार हो जाएगा।
साध्वी ने कहा कि भस्मासुर ने प्रभु से वरदान प्राप्त किया था कि मैं जिस के सिर पर भी हाथ रखूं वो उसी समय भस्म हो जाए। प्रभु ने उसे वरदान दे दिया लेकिन भस्मासुर ने जिनसे वरदान प्राप्त किया उन्हीं शिव को भस्म करने के लिए चल पड़ा। ठीक यही काम आज इंसान भी कर रहा है जिस ईश्वर ने हमें सुंदर जीवन दिया और जीवन को सुरक्षित करने के लिए हमारे चारों और सुंदर पर्यावरण दिया। हमें प्रकृति की ममता भरी गोद दी। आज भारत की बहुत सारी नदियां गंदे नालों का रूप धारण कर चुकी हैं। इन में उत्तरी भारत की दो प्रसिद्ध नदियां गंगा और यमुना भी शामिल हैं।